तुमसर-मोहाडी में बेरोजगारी बनी बड़ी चुनौती, चाय-पान टपरी तक सीमित हो रहे युवा

Bhandara Employment Crisis: तुमसर और मोहाडी तहसील में बढ़ती बेरोजगारी गंभीर समस्या बनती जा रही है। स्थानीय लोगों ने क्षेत्र में नए उद्योग स्थापित करने की मांग उठाई है।
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Closed Factories (सोर्सः फाइल फोटो-सोशल मीडिया)
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Bhandara Industrial Closure: जिस समय आधुनिकता नहीं थी उस समय लोगों के हाथों को क्षेत्र में काम मिलता था। लेकिन डिजिटल जमाने में युवाओं को रोजगार के लिए दर दर भटकना पड़ रहा है एवं रोजगार की तलाश में अन्य शहरों में जाना पड़ता है। वर्तमान में तुमसर व मोहाडी तहसील में बेरोजगारी एक त्रासदी बन चुकी है। कुबेर नगरी के नाम से तुमसर तहसील के उद्योग धंधे बंद होने एव नए कारखाने शुरू नहीं होने से बेरोजगारों के साथ ही छोटे बडे व्यापारियों इसका भुगतान भुगतना पड़ रहा हैं।

एक भी नए कारखाने की नही रखी नींवबीते 4 दशकों में क्षेत्र के शुरू सभी उद्योग धंदे बंद हुए, लेकिन एक भी नए कारखाने की नींव नहीं रखी जाने से क्षेत्र सुशिक्षित बेरोजगारों मजबूरन शहर छोड़कर जाना पड़ता है, साथ ही क्षेत्र में उच्च शिक्षित युवाओं की फौज खड़ी हुई है। उन्हें काम धंदा नहीं मिलने से चाय पान टपरी पर टाइमपास करते हुए दिखाई देते हैं।

उद्योगों के बंद होने से बढ़ी बेरोजगारी

वर्ष 1978 में तुमसर व मोहाडी तहसील अंतर्गत आनेवाले देव्हाडा गांव में एलोरा पेपर मिल की स्थापना की गई थी। उस दौरान कंपनी में उत्पादन शुरु होने पर भंडारा व गोंदिया जिले के लोगों को उनके योग्यता नुसार काम मिला था। इससे कुछ प्रमाण में क्षेत्र की बेरोजगारी दूर हो गई थी। कुछ वर्षों पूर्व उत्पादन तथा प्रबंधन में नफा व नुकसान को लेकर पेपर मिल की हालत पहले जैसी नहीं रही है।

वर्षों से बंद है खम्बाटा कंपनी

सामाजिक कार्यकर्ता अनिल कारेमोरे ने कहा कि, शहर से 9 कि मी दूर माडगी स्थित खम्बाटा कंपनी शुरु रहते समय शहर का व्यापार जगत ख़ुशी से खिल उठता था। कंपनी के वेतन वाले दिन शहर की रौनक में चार चांद लग जाते थे। लेकिन गत 25 वर्ष से कंपनी बंद होने से हजारों लोगों को रोजी रोटी छिनी गई है। पूर्व के राजनितिक नेताओं ने क्षेत्र में विकास का बीड़ा उठाया होता तो युवकों को दरदर की ठोकरे खानी नहीं पड़ती है।

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