Maharashtra Agriculture Crisis News: तुमसर रासायनिक खाद की कीमत 2 वर्ष में दोगुना बढ़ गई हैं। सरकार द्वारा रासायनिक खाद के अनुदान को कम कर दिया गया जिससे अब खाद की दर में बढ़ोत्तरी की गई है। वर्तमान में प्रत्येक बोरी पर 200 से 400 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। जबकि खेती का उत्पादन बढ़ाने के लिए रासायनिक खाद आवश्यक है।
सरकार द्वारा यूरिया व डीएपी इन दो खाद पर निर्धारित अनुदान देकर इन खादों की कीमत को नियंत्रण में रखा गया है। इसी तरह मूल्य आधारित अनुदान दिया है। जिससे अंतराष्ट्रीय बाजार में जिस पद्धति से खाद के दाम बढ़ेंगे, उसी प्रमाण में देश में खाद के दाम में कंपनियां वृद्धि करेंगी। इस दर वृद्धि के लिए कंपनियों पर कोई भी नियंत्रण नहीं रखने से कंपनियां बढ़े हुए भाव पर खाद बाजार में लाएगी।
इस संबंध में किसानों ने बताया कि, रासायनिक खाद के लिए अब दोगुना खर्च करना पड़ रहा है। इसके बावजूद खाद समय पर बाजार में नहीं मिलता है। रासायनिक खाद के उपयोग बिना उत्पादन भी नहीं मिलता। वर्तमान में किसानों की अवस्था दयनीय है। जिससे सरकार को इस संबंध में उचित निर्णय लेने की आवश्यकता है।
किसानों द्वारा फसलों के अधिक उत्पादन के लिए नईनई तकनीक अपनाई जा रही है, इससे उत्पादन भी अधिक हो रहा है़। लेकिन पेट्रोलडीजल के दामों में बढ़ोत्तरी से खेत सामग्रियों के दाम भी बढ़ गए है़। इससे खेती करना महंगा हो गया है़, वहीं मजदूरी भी बढ गई है़। उल्लेखनीय है कि, भारत कृषि प्रधान देश है़ देश के 70 फीसदी नागरिक ग्रामीण क्षेत्र में खेती व्यवसाय से जुड़े हुए है़ं।
वर्षों पूर्व ग्रामीण क्षेत्र के अधिकांश किसानों द्वारा पूर्वजों की नीति के तहत खेती में फसल ली जा रही थी़। लेकिन विज्ञान के दौर में खेती व्यवसाय में उत्पादकता बढ़ाने के लिए आधुनिक मशीनों का उपयोग किया जा रहा है़। फसल काटने के लिए अब आधुनिक मशीनों का अधिक उपयोग किया जा रहा है़।
फसल के उत्पादन में वृद्धि के लिए ग्रामीण क्षेत्र में आधुनिक मशीनों से खेती की में विभिन्न कार्य किए जा रहे है़ं। ग्रामीण क्षेत्र के किसानों द्वारा खेत की मशागत के लिए ज्यादातर ट्रैक्टर का उपयोग किया जा रहा है़। लेकिन गत कुछ महीनों से सरकार द्वारा पेट्रोलडीजल के दामों में बढ़ोत्तरी की गई है़। इससे ट्रैक्टर का किराया भी बढ गया है़। खेती की लागत बढ़ती जा रही है़। इससे गरीब किसानों को अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है़।