Bhandara News: नागझिरा व्याघ्र परियोजना के घने और डरावने जंगल में इन दिनों एक ऐसा मनोवैज्ञानिक युद्ध चल रहा है, जहां एक ओर इंसानी तकनीक और संसाधन हैं, तो दूसरी ओर एक वन्यजीव की कुशाग्र बुद्धि.
टी27 नामक वह बाघिन, जिसने पिछले कुछ दिनों में इंसानी बस्तियों के पास मौत का तांडव मचा रखा है, अब वन विभाग के लिए एक अबूझ पहेली बन गई है. पिछले 24 दिनों से जारी इस ऑपरेशन में विभाग के 170 से ज्यादा जांबाज कर्मचारी तैनात हैं, लेकिन गर्मी के बढ़ते पारे के बीच यह आदमखोर बाघिन अभी भी उनकी पहुंच से कोसों दूर अपनी मर्जी से ठिकाने बदल रही है.
खौफ का यह सिलसिला 19 मार्च से शुरू हुआ था, जब वसंत मेश्राम पर हुए हमले ने ग्रामीणों की नींद उड़ा दी थी. इसके बाद 28 मार्च को माया सोनवाने की दुखद मृत्यु और 1 अप्रैल को छाया मुंगमोडे पर हुए जानलेवा हमले ने यह स्पष्ट कर दिया कि टी27 अब केवल एक शिकारी नहीं, बल्कि एक नरभक्षक बन चुकी है. 12 अप्रैल की तारीख बीतने को है, लेकिन पिटेझरी और उमरझरी के जंगलों में तैनात वन विकास महामंडल और एसटीपीएफ की टीमें केवल पैरों के निशान ही ढूंढ पा रही हैं.
वन विभाग ने इस शातिर बाघिन को लालच देकर एक स्थान पर स्थिर करने के लिए 8 अलगअलग संवेदनशील पॉइंट्स पर शिकार बांधे थे. उम्मीद थी कि भूख की तड़प उसे इन ठिकानों तक खींच लाएगी और मचानों पर तैनात शूटर उसे बेहोश कर पिंजरे में डाल देंगे. परंतु कुदरत का करिश्मा देखिए, जिस शिकार को बाघिन के लिए रखा गया था, उसे चालाक तेंदुए चट कर गए और बाघिन ने उन रास्तों की ओर मुड़कर भी नहीं देखा.
सीसीटीवी फुटेज में जब तेंदुओं की तस्वीरें आईं, तो विभाग के अधिकारियों के माथे पर चिंता की लकीरें और गहरी हो गईं. बाघिन की हर हरकत को कैद करने के लिए 90 नाइट विजन और मोशन सेंसर कैमरों का जाल बिछाया गया है. उमरझरी, बाम्पेवाडा और निपरटोला के जंगलों में विशेष व्याघ्र संरक्षण बल की तीन टीमें 24 घंटे गश्त कर रही हैं.
ग्रामीणों को हमलों से बचाने के लिए सिर के पीछे पहनने वाले विशेष मुखौटे बांटे गए हैं, ताकि बाघिन को भ्रम हो सके. मचानों पर बैठे कर्मचारी भीषण गर्मी और मच्छरों के प्रकोप के बीच केवल एक अवसर की तलाश में हैं, ताकि इस दहशत का अंत हो सके और ग्रामीणों को खौफ के साये से मुक्ति मिल सके. फिलहाल पूरे भंडारा जिले की सांसें इस रोमांचक और खतरनाक अभियान पर टिकी हैं.
बाघ प्रकृति के सबसे बुद्धिमान और कुशल शिकारी होते हैं. वे सामान्यतः इंसानों से दूरी बनाकर रखते हैं और केवल अत्यंत विपरीत परिस्थितियों या किसी शारीरिक मजबूरी में ही मानव पर हमला करते हैं. टी27 बाघिन को लेकर जो स्थिति बनी है, उसे देखते हुए वन विभाग की पूरी मशीनरी उसे सुरक्षित रूप से पकड़ने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा रही है.
प्रीतमसिंग कोडापे, उपसंचालक, एनएनटीआर ने कहा कि हमारे कर्मचारी दिनरात जोखिम उठाकर इस मिशन में जुटे हुए हैं. चूंकि यह एक बेहद जटिल और संवेदनशील ऑपरेशन है, इसलिए मेरा स्थानीय नागरिकों से विनम्र अनुरोध है कि वे धैर्य बनाए रखें. अफवाहों पर ध्यान न दें और वन विभाग के जारी सुरक्षा निर्देशों का पालन करें.