Bhandara News: उमरेडपवनीकरानडला अभयारण्य क्षेत्र के तहसील के 12 गांवों के पुनर्वास और मुआवजे की मांग को लेकर शुरू किया गया क्रमिक अनशन आखिरकार समाप्त हो गया. विधायक नरेंद्र भोंडेकर की मध्यस्थता से 6 दिन से जारी आंदोलन खत्म हुआ. वन्यजीव अभयारण्य अन्याय पीड़ित कार्य समिति द्वारा 6 अप्रैल से पवनी स्थित बाघ परियोजना कार्यालय के सामने क्रमिक भूख हड़ताल शुरू की गई थी.
इस दौरान विभिन्न राजनीतिक दलों और संगठनों के पदाधिकारियों ने भी हड़ताल को समर्थन दिया. शनिवार को विधायक भोंडेकर ने अनशन स्थल का दौरा कर संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा की. उन्होंने अनशनकारियों को आश्वस्त करते हुए उनकी मांगों पर सकारात्मक पहल का भरोसा दिलाया. इसके बाद उनके हाथों अनशनकारियों को नींबू पानी पिलाकर भूख हड़ताल समाप्त कराई गई.
अनशनकारियों की प्रमुख मांगों में भूमि अधिग्रहण की दरों की घोषणा, प्रभावित गांवों का पुनर्वास, बेरोजगारों को वन विभाग में मौसमी रोजगार, प्रत्येक परिवार से एक सदस्य को योग्यता के आधार पर सरकारी नौकरी तथा प्रत्येक परिवार को 25 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग शामिल थी. साथ ही प्रभावित क्षेत्रों के ग्रामीणों को परियोजना प्रभावित प्रमाणपत्र जारी करने की मांग भी की गई.
इस बीच जिला कलेक्टर भंडारा की अध्यक्षता में हुई बैठक में भूअभिलेख विभाग को पहुनगांव और कवडसी गांवों की गिनती सर्वे शुरू करने के निर्देश दिए गए. भूअभिलेख उपअधीक्षक अमित धागे ने एक माह के भीतर सर्वे कार्य पूर्ण करने का आश्वासन दिया. वन विभाग के रेंज अधिकारी एम.आर. चौधरी ने भी अनशनकारियों से लिखित में अनशन वापस लेने का अनुरोध किया, जिसे स्वीकार करते हुए समिति ने अनशन समाप्त कर दिया.
आंदोलन में समिति के मुख्य समन्वयक अनिल मेंढे, समन्वयक बबलू वाघमारे, हरीश तलमले, अरविंद असाई, गुलाब असाई सहित विभिन्न गांवों के सरपंच, उपसरपंच, ग्राम पंचायत सदस्य और बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने बारीबारी से सहभाग लिया. प्रशासन के आश्वासन के बाद अनशन स्थगित किया गया है और अब सभी की नजरें मांगों के क्रियान्वयन पर टिकी हैं.