साकोली: निधि मिलते ही श्रेयवाद की राजनीति शुरू, अखाड़ा बना तालाब की टूटी हुई पार का पुनर्निर्माण कार्य
Akola Fishermen Issue: स्थानीय तालाब की टूटी पार के पुनर्निर्माण और मरम्मत के लिए 4।01 करोड़ रुपये की मंजूरी मिल गई है। इस परियोजना को लेकर राजनीतिक दलों के बीच श्रेय लेने की होड़ तेज हो गई है।
Akola Pond (सोर्सः फाइल फोटो- सोशल मीडिया)
Akola Farmers Relief Project: स्थानीय तालाब की टूटी हुई पार के पुनर्निर्माण और मरम्मत के लिए अंततः 4.01 करोड़ रुपये की भारीभरकम निधि मंजूर हो गई है।लेकिन विकास कार्य की इस राहत भरी खबर के साथ ही क्षेत्र में राजनीतिक घमासान भी तेज हो गया है। निधि मंजूरी की घोषणा होते ही विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच इसका श्रेय लेने की होड़ मच गई है, जिससे यह जनहित का मुद्दा अब राजनीति का अखाड़ा बन चुका है। विदित हो कि पिछले वर्ष 1 अगस्त को हुई मूसलाधार बारिश के कारण तालाब की पार टूट गई थी, जिससे क्षेत्र के अनेक किसानों और मछुआरों को व्यापक आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा था।
घटना के तुरंत बाद भाजपा, कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस और शिवसेना सहित सभी प्रमुख राजनीतिक दलों और जनप्रतिनिधियों ने मौके पर पहुंचकर शीघ्र निधि मंजूर करवाने और पार के पुनर्निर्माण के बड़ेबड़े आश्वासन दिए थे। हालांकि, प्रारंभिक सक्रियता के बाद लंबे समय तक इस मुद्दे पर कोई ठोस पहल नहीं हो सकी। पूरी गर्मी का सीजन बीत जाने के बाद भी पार का स्थायी निर्माण शुरू नहीं होने से यह आशंका बनी हुई थी कि अस्थायी रूप से बनाई गई दीवार आगामी मानसून में फिर से ढह जाएगी।
प्रशासन की उदासीनता
इस गंभीर मुद्दे और प्रशासन की उदासीनता को लेकर 13 मार्च 2026 को नवभारत ने प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया था। खबर के माध्यम से किसानों एवं मछुआरों को होने वाले संभावित नुकसान की चेतावनी दी गई, जिसके बाद एक बार फिर जनप्रतिनिधि और संबंधित पक्ष सक्रिय हुए तथा पुनः पत्राचार और निवेदनों का दौर शुरू हुआ।
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योगदान को स्वीकारे
बुधवार को जैसे ही 4.01 करोड़ रुपये की आधिकारिक मंजूरी मिली, श्रेय की लड़ाई शुरू हो गई। कांग्रेस कार्यकर्ताओं का दावा है कि यह सफलता विधायक नाना पटोले के निरंतर प्रयासों और प्रभावी पैरवी का नतीजा है। विधानसभा में इस मुद्दे को उठाने और लगातार अनुवर्ती कार्रवाई के कारण ही यह निधि संभव हो पाई है।
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वित्तीय आवंटन
भाजपा कार्यकर्ताओं ने इसे विधायक डॉ. परिणय फुके के अथक परिश्रम का प्रतिफल बताया है। राज्य सरकार के माध्यम से इस महत्वपूर्ण कार्य के लिए वित्तीय आवंटन फुके के विशेष प्रयासों से हुआ है। केवल चुनावी मुद्दा बनकर रह जाए निधिमंजूर निधि से तालाब के क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत, पार की पिचिंग, नई ऊर्ध्वाधर संरचना का निर्माण, गेट का पुनर्निर्माण, गहरीकरण और रिसाव रोकने के लिए विशेष सीमेंट कार्य किए जाएंगे।
नागरिकों की अब एकमात्र मांग यह है कि मानसून सिर पर है, इसलिए कागजी श्रेय लेने के बजाय प्रशासन युद्ध स्तर पर निर्माण कार्य शुरू करे ताकि इस बार बरसात में किसानों और मछुआरों को फिर से तबाही का सामना न करना पड़े।
