पिग्मी एजेंटों के कमीशन में कटौती का विरोध, अभिकर्ताओं ने जिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन
Lakhandur Pigmy Agents Protest : लाखांदुर में पिग्मी एजेंटों और नित्यनिधि अभिकर्ताओं ने सहकार आयुक्त द्वारा कमीशन 2।5 प्रतिशत किए जाने के फैसले का विरोध करते हुए जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा।
Agent Protest (सोर्सः एआय जनरेटेड प्रतिकात्मक फोटो-सोशल मीडिया)
Memorandum To Collector: सहकार आयुक्त के आदेशानुसार पिग्मी एजेंटों का कमीशन घटाकर 2.5 प्रतिशत किए जाने के निर्णय का तहसील पतसंस्था नित्यनिधि अभिकर्ताओं ने कड़ा विरोध किया है। बढ़ती महंगाई के दौर में इस निर्णय को अन्यायपूर्ण बताते हुए इसे तत्काल वापस लेने की मांग को लेकर तहसील पतसंस्था नित्यनिधि अभिकर्ता कल्याण संगठन की ओर से जिलाधिकारी सावन कुमार को ज्ञापन सौंपा गया।अभिकर्ताओं ने बताई आर्थिक परेशानियांज्ञापन में कहा गया है कि पिग्मी एजेंट ग्राहकों के घरघर जाकर दैनिक बचत संग्रह करते हैं और इसके लिए अपने निजी वाहन तथा ईंधन का खर्च स्वयं वहन करते हैं।
तेज धूप, बारिश और अन्य प्रतिकूल परिस्थितियों में कार्य करने वाले इन अभिकर्ताओं के लिए केवल 2.5 प्रतिशत कमीशन पर परिवार का पालनपोषण करना बेहद कठिन हो गया है।अभिकर्ताओं का कहना है कि ईंधन और आवश्यक वस्तुओं की लगातार बढ़ती कीमतों ने पहले ही उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर कर दी है। ऐसे समय में कमीशन में कटौती का निर्णय उनके लिए दोहरी मार साबित होगा। उन्होंने यह भी कहा कि जब सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के वेतन में लगातार वृद्धि हो रही है, तब मेहनतकश अभिकर्ताओं के कमीशन में कटौती करना न्यायसंगत नहीं है।
पतसंस्थाओं पर भी पड़ सकता है असर
अभिकर्ताओं ने कहा कि वे पतसंस्थाओं को समाज के हर वर्ग से जोड़ने और लोगों में बचत की आदत विकसित करने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं। ऋण वसूली में भी उनकी अहम भूमिका रहती है। यदि कमीशन में कटौती के कारण अभिकर्ता दैनिक संग्रह कार्य बंद करने को मजबूर हुए, तो इसका सीधा असर पतसंस्थाओं की आर्थिक व्यवस्था पर पड़ेगा। उन्होंने आशंका जताई कि यदि बड़ी संख्या में जमाकर्ता एक साथ अपनी जमा राशि वापस मांगते हैं तो कई पतसंस्थाएं आर्थिक संकट में आ सकती हैं।
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सरकार को यह निर्णय तत्काल वापस लेना चाहिए
इसलिए सरकार को यह निर्णय तत्काल वापस लेना चाहिए, अन्यथा अभिकर्ता दैनिक संग्रह कार्य बंद करने के लिए बाध्य होंगे। ज्ञापन सौंपने के दौरान संगठन के अध्यक्ष अरुण माकड़े, उपाध्यक्ष देवेंद्र निखाड़े, सचिव सुधाकर वझाड़े सहित कैलास नाकतोडे, मनोज राऊत, प्रशांत मेंढे, मुकेश माडे, चुनीलाल ढोरे, नरेंद्र दिवटे, स्वप्निल पिलारे, शेषराव वाढीवे, सुनील समरीत, उमेश नागपुरे, हेमंत उरकुडे, ललित दाणे, विलास नरुले, डोलीराम चेटुले तथा तहसील के बड़ी संख्या में अभिकर्ता उपस्थित थे।
