Bhandara District Collector News: उमरेड-पवनी-करानडला अभयारण्य क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले 12 गांवों के पुनर्वास और मुआवजे की मांग को लेकर शुरू किया गया क्रमिक अनशन आखिरकार समाप्त हो गया। यह आंदोलन 6 दिनों तक जारी रहने के बाद 11 अप्रैल को समाप्त हुआ, जिसमें विधायक नरेंद्र भोंडेकर की मध्यस्थता महत्वपूर्ण रही।
वन्यजीव अभयारण्य अन्याय पीड़ित कार्य समिति के नेतृत्व में 6 अप्रैल से पवनी स्थित बाघ परियोजना कार्यालय के सामने क्रमिक भूख हड़ताल शुरू की गई थी। आंदोलन को विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों का समर्थन प्राप्त हुआ।
शनिवार को विधायक भोंडेकर ने अनशन स्थल का दौरा कर संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा की और अनशनकारियों को उनकी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई का आश्वासन दिया। इसके बाद उनके हाथों अनशनकारियों को नींबू पानी पिलाकर भूख हड़ताल समाप्त कराई गई।
अनशनकारियों की प्रमुख मांगों में भूमि अधिग्रहण की दरों की घोषणा, प्रभावित गांवों का पुनर्वास, बेरोजगारों को वन विभाग में मौसमी रोजगार, प्रत्येक परिवार से एक सदस्य को योग्यता के आधार पर सरकारी नौकरी तथा प्रत्येक परिवार को 25 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग शामिल थी।
इस बीच 10 अप्रैल को जिला कलेक्टर भंडारा की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में भूअभिलेख विभाग को पहुनगांव और कवडसी गांवों का गणना सर्वे शुरू करने के निर्देश दिए गए। भूअभिलेख उपअधीक्षक अमित धागे ने एक माह के भीतर सर्वे कार्य पूर्ण करने का आश्वासन दिया। वन विभाग के रेंज अधिकारी एम.आर. चौधरी ने भी अनशनकारियों से लिखित में आंदोलन समाप्त करने का अनुरोध किया, जिसे समिति ने स्वीकार कर लिया।
इस छह दिवसीय आंदोलन में समिति के मुख्य समन्वयक अनिल मेंढे, बबलू वाघमारे, हरीश तलमले, अरविंद असाई, गुलाब असाई सहित विभिन्न गांवों के जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने सक्रिय सहभाग लिया।