Agriculture Maharashtra News: भंडारा जिले के किसानों के लिए इस वर्ष का खरीफ सीजन उम्मीदों के बजाय चिंताओं का सबब बन गया है। धान खरीदी की अंतिम तिथि 31 मार्च बेहद करीब आ चुकी है और अब केवल 18 दिन शेष बचे हैं, लेकिन सरकारी तंत्र की सुस्ती के कारण जिले में पिछले डेढ़ से दो महीने से खरीदी प्रक्रिया पूरी तरह ठप पड़ी है।
किसान इस समय दोहरी मार झेल रहे हैं। एक तरफ धान केंद्रों और घरों में पड़ा हुआ धान सड़ रहा है, तो दूसरी तरफ बेचे गए धान का भुगतान न मिलने से उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। सरकार के इस ठंडे रुख ने अन्नदाता को हताश कर दिया है।
सरकारी आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले रबी सीजन में धान की खरीदी में रिकॉर्ड तोड़ बढ़ोतरी देखी गई। जहां एक वर्ष पूर्व रबी की खरीदी केवल 3 लाख क्विंटल थी, वहीं पिछले रबी सीजन में यह बढ़कर 18 लाख क्विंटल तक पहुंच गई। इसी तर्ज पर इस खरीफ सीजन में भी भारी आवक का अनुमान लगाया था।
यह अनुमान सही भी साबित हुआ क्योंकि अब तक लगभग 88,115 किसानों से 31,57,313 क्विंटल धान खरीदा जा चुका है, जो पिछले वर्ष के मुकाबले करीब 2.63 लाख क्विंटल अधिक है। लेकिन विडंबना यह है कि जब खरीदी की रफ्तार चरम पर थी, तभी सरकार ने नई लिमिट रोक दी।
जिला मार्केटिंग फेडरेशन ने शासन से अतिरिक्त 20 लाख क्विंटल धान खरीदी की लिमिट बढ़ाने की मांग की है। अधिकारियों का कहना है कि इसके लिए शासन को दर्जनों पत्र लिखे जा चुके हैं और वस्तुस्थिति से अवगत कराया जा चुका है, लेकिन मुख्यालय से अब तक कोई सकारात्मक जवाब नहीं आया है।
सरकार की इस अनदेखी का फायदा अब निजी व्यापारी उठा रहे हैं। सरकारी केंद्रों पर लिमिट न होने और खरीदी बंद होने के कारण परेशान किसान औनेपौने दामों पर अपना धान निजी व्यापारियों को बेचने के लिए मजबूर हैं। किसानों का कहना है कि कड़ी मेहनत के बाद उपजाया गया धान अब उनकी आंखों के सामने खराब हो रहा है, जिससे उन्हें लग रहा है कि अधिक उपज लेना उनके लिए सजा बन गया है।
संकट केवल खरीदी तक सीमित नहीं है, बल्कि भुगतान यानी चुकारे की स्थिति भी बेहद दयनीय है। जिले के 88,115 किसानों से अब तक 747.96 करोड़ रुपये मूल्य का धान खरीदा गया है, लेकिन भुगतान के नाम पर अब भी भारी अंतर बना हुआ है।