पिटेझरी जंगल में जवानों की फौज (सौजन्य-नवभारत)
Navegaon Nagzira Tiger Reserve News: भंडारा जिले के नवेगांव-नागझिरा के पिटेझरी जंगल में घायल बाघिन टी-27 का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। पिछले 15 दिनों में तीन हमलों से दहशत फैली हुई है, वहीं 200 से ज्यादा जवान और शार्प शूटर्स भी उसे पकड़ने में अब तक नाकाम रहे हैं। घायल बाघिन ने पिछले पखवाड़े में जो कोहराम मचाया है, उसने प्रशासन की नींद उड़ा दी है और ग्रामीणों के दिलों में दहशत का ऐसा बीज बोया है कि लोग अपने ही खेतों में जाने से कतरा रहे हैं।
पिटेझरी के जंगल से सटे गांवों में पिछले पंद्रह दिनों का घटनाक्रम किसी डरावनी फिल्म के दृश्य जैसा रहा है। इस खूनी सिलसिले की शुरुआत 19 मार्च को हुई जब वसंत मेश्राम बाघिन का पहला शिकार बने। फिर 28 मार्च को माया सोनवाने पर बाघिन ने प्राणघातक हमला कर दिया, जिनकी अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई। इसके बाद 1 अप्रैल को छाया मुंगमोडे पर बाघिन ने हमला किया।
छाया फिलहाल नागपुर के अस्पताल में जीवन और मौत के बीच जंग लड़ रही हैं। इन तीन घटनाओं ने ग्रामीण अंचलों में सन्नाटा पसरा दिया है। बाघिन को पकड़ने के लिए वन विभाग के प्रयास तेज हो गए है। करीब 200 वन कर्मचारियों का दल, विशेष एसटीपीएफ यूनिट और 4 अनुभवी शार्प शूटर्स जंगल के चप्पे-चप्पे पर हैं। जंगल में 50 से अधिक कैमरा ट्रैप और 10 लाइव कैमरे लगाए गए हैं ताकि बाघिन की हर हरकत पर नजर रखी जा सके।
पिटेझरी जंगल में जवानों की फौज (सौजन्य-नवभारत)
रात के अंधेरे में उसकी सटीक लोकेशन जानने के लिए 4 थर्मल ड्रोन की मदद ली जा रही है। पिटेझरी के कक्ष क्रमांक 143 को मुख्य केंद्र बनाकर वहां बाघिन को आकर्षित करने के लिए चारे के साथ मचान भी तैयार की गई है, लेकिन यह घायल बाघिन अपनी चालाकी से हर जाल को काटती हुई सुरक्षाबलों को लगातार गुमराह कर रही है।
इस चुनौतीपूर्ण घड़ी में वन विभाग की महिला वनरक्षकों ने अद्भुत साहस का परिचय दिया है। ये जांबाज महिलाएं सीधे घने जंगलों में उतरकर न केवल बाघिन की तलाश कर रही हैं, बल्कि उमरझरी, आतेगांव, घानोड, शिवनटोला, आमगांव, खैरी और बांपेवाडा जैसे संवेदनशील गांवों में घर-घर जाकर लोगों को जागरूक भी कर रही हैं। महुआ चुनने वाले ग्रामीणों को सुरक्षा के लिए विशेष मानवीय मुखौटे वितरित किए गए हैं। ग्रामीणों को सख्त हिदायत दी गई है कि वे किसी भी स्थिति में अकेले जंगल की ओर रुख न करें।
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वर्तमान में क्षेत्र में मक्के की कटाई का सीजन अपने चरम पर है। खेतों में सुनहरी फसल तैयार खड़ी है, लेकिन जान का जोखिम इतना बड़ा है कि मजदूर और ग्रामीण महिलाएं खेतों में कदम रखने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। किसानों को डर है कि अगर समय पर कटाई नहीं हुई तो उनकी साल भर की मेहनत बर्बाद हो जाएगी।
इस संकट के बीच एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक बदलाव किया गया है। 1 अप्रैल से नवेगांव-नागझिरा क्षेत्र में एकल नियंत्रण प्रणाली को लागू कर दिया गया। नए नियम के तहत अब बफर जोन का पूरा प्रशासनिक और सुरक्षा संबंधी जिम्मा सीधे व्याघ्र परियोजना को मिल गया है।इस व्यवस्था का मुख्य लक्ष्य मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करना करना है, लेकिन कार्यभार संभालते ही टी-27 बाघिन की ओर से खड़ा किया गया यह संकट नए प्रशासन के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है।