UCC Maharashtra News: भंडारा से विधान परिषद सदस्य डॉ. परिणय फुके ने समान नागरिक संहिता (समान नागरिक संहिता) लागू करने के मुद्दे पर सरकार से उच्चस्तरीय समिति गठित करने की मांग की है।
उन्होंने लक्षवेधी के माध्यम से कहा कि यह विषय केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि भारतीय संविधान के मार्गदर्शक सिद्धांतों से जुड़ा हुआ है। अनुच्छेद 44 और अनुच्छेद 252 का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सभी नागरिकों के लिए समान कानून की दिशा संविधान में स्पष्ट रूप से निहित है।
फुके ने कहा कि वर्तमान में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और दत्तक जैसे मामलों में धर्म आधारित अलग-अलग कानून लागू होने से असमानता की स्थिति बनती है। उन्होंने मोहम्मद अहमद खान बनाम शाह बानो बेगम और सरला मुदगल बनाम भारत सरकार जैसे महत्वपूर्ण मामलों का हवाला देते हुए कहा कि इन निर्णयों में भी समान नागरिक संहिता की आवश्यकता को रेखांकित किया गया है।
उन्होंने उत्तराखंड यूनिफॉर्म सिविल कोड अधिनियम 2024 का उदाहरण देते हुए इसे आदर्श बताया और कहा कि महाराष्ट्र को भी इस दिशा में पहल करनी चाहिए।
डॉ. परिणय फुके ने कहा कि महाराष्ट्र महात्मा ज्योतिराव फुले, सावित्रीबाई फुले और डॉ. भीमराव आंबेडकर की समतावादी विचारधारा की भूमि है, इसलिए राज्य को समान नागरिक संहिता की दिशा में पहल करनी चाहिए।
उनका कहना है कि अलग-अलग कानून सामाजिक समरसता और प्रशासनिक व्यवस्था को प्रभावित करते हैं। समान नागरिक संहिता महिलाओं के अधिकारों को सशक्त बनाने और सभी नागरिकों को समान न्याय दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।