लाखनी में ‘कामबंद’ का शोर: 19 महीने से आधे वेतन पर गुजारा कर रहे ग्रापं कर्मी सड़क पर, ग्रामीण व्यवस्था ठप!
Lakhani Gram Panchayat Strike: लाखनी (भंडारा) में ग्राम पंचायत कर्मियों का कामबंद आंदोलन। 19 महीने का मानदेय बकाया। ग्रामीण सेवाओं पर संकट, पंचायत समिति के सामने धरना।
- Written By: प्रिया जैस
लाखनी में कामबंद आंदोलन (सौजन्य-नवभारत)
Bhandara Rural News: भंडारा ग्रामीण विकास की रीढ़ माने जाने वाले ग्राम पंचायत कर्मचारी अपने हक के मानदेय के लिए अब सड़क पर उतर आए हैं। महाराष्ट्र ग्राम पंचायत कामगार सेना के नेतृत्व में सोमवार से लाखनी पंचायत समिति कार्यालय के समक्ष अनिश्चितकालीन कामबंद आंदोलन शुरू कर दिया गया है। सैकड़ों कर्मचारियों ने पंचायत समिति के प्रवेशद्वार पर धरना देते हुए प्रशासन के खिलाफ तीव्र नाराजगी व्यक्त की।
आंदोलन के कारण तहसील स्तर की प्रशासनिक व्यवस्था ठप पड़ने की आशंका जताई जा रही है। लाखनी तहसील की विभिन्न ग्राम पंचायतों में कार्यरत कर्मचारियों को पिछले 19 महीनों से पूर्ण मानदेय प्राप्त नहीं हुआ है। वेतन का 50 प्रतिशत हिस्सा अभी भी बकाया बताया जा रहा है।
कर्मचारियों का आरोप है कि कोरोना काल में जोखिम उठाकर सेवा देने के बावजूद मार्च 2019 के कालखंड के दो वर्षों का मानदेय भी लंबित है। आंदोलनकारियों ने सवाल उठाया कि पड़ोसी लाखांदुर पंचायत समिति में निधि वितरित हो चुकी है, तो केवल लाखनी में ही भुगतान क्यों रोका गया है?
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भविष्य निधि व भत्ते भी बकाया
कर्मचारियों के अनुसार, पिछले दो वर्षों से भविष्य निर्वाह निधि (पीएफ) और महंगाई/रहनीमान भत्ता भी जमा नहीं किया गया है। सेवानिवृत्त कर्मचारियों की स्थिति और भी गंभीर है। खैरी, दिघोरी, रेंगेपार व खराशी ग्रामपंचायतों के सेवानिवृत्त कर्मियों को अब तक पेंशन और अन्य देयक नहीं मिले हैं, जिससे वे आर्थिक संकट में हैं।
- 19 माह से मानदेय लंबित
- 50 प्रतिशत वेतन बकाया
कामबंद आंदोलन से ग्रामीण क्षेत्रों में पानी आपूर्ति, सफाई, बिजली व्यवस्था और कार्यालयीन कार्य बाधित होने की संभावना है। गर्मी के मौसम से पहले यदि जलापूर्ति प्रभावित होती है तो ग्रामीण जनता को जलसंकट का सामना करना पड़ सकता है। स्वास्थ्य और स्वच्छता संबंधी समस्याएं भी बढ़ने की आशंका है।
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प्रमुख मांगें
19 महीनों का लंबित 50 प्रतिशत मानदेय तत्काल दिया जाए, कोरोना काल के दो वर्षों का बकाया भुगतान किया जाए, लंबित भत्ते और दो वर्षों की भविष्य निधि जमा की जाए, नियमित मासिक वेतन के लिए जिला परिषद को समय पर प्रस्ताव भेजे जाएं, सेवानिवृत्त कर्मचारियों के सभी बकाया देयकों का प्राथमिकता से निपटारा किया जाए।
ठोस निर्णय तक आंदोलन जारी
- आंदोलन का नेतृत्व तहसील अध्यक्ष कैलास नान्हे, उपाध्यक्ष चंद्रशेखर रहांगडाले और सचिव मारोती चेटुले कर रहे हैं।
- कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि जब तक लिखित आश्वासन और ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
- कर्मचारियों के इस ‘आर-पार’ के रुख से प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है और ग्रामीण क्षेत्रों में जनसेवाओं के प्रभावित होने की आशंका गहरा गई है।
