मनोधैर्य योजना (सौजन्य-सोशल मीडिया)
District Legal Services Authority: अत्याचार से पीड़ित महिलाओं, युवतियों और बच्चों को मानसिक आघात से उबारने तथा उन्हें सम्मानपूर्वक जीवन जीने का संबल देने के लिए राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही मनोधैर्य योजना के तहत जिले में प्रभावी कार्यान्वयन किया जा रहा है।
वर्ष 2013 में शुरू हुई यह योजना 2018 से संशोधित स्वरूप में राज्य विधि सेवा प्राधिकरण के माध्यम से अधिक गतिशील ढंग से लागू की जा रही है। वर्ष 2025 में जिले के 40 पीड़ितों को इस योजना का लाभ मिला है, जबकि पिछले सात वर्षों में कुल 234 लाभार्थियों को सहायता प्रदान की गई है।
पिछले एक वर्ष में भंडारा जिले में मनोधैर्य योजना के तहत कुल 93 आवेदन प्राप्त हुए। जिला विधि सेवा प्राधिकरण की समिति ने सभी आवेदनों की निर्धारित मानकों के अनुसार जांच की। इनमें से 40 आवेदनों को स्वीकृति दी गई, जबकि 53 आवेदन पात्रता के मानदंडों में न आने के कारण निरस्त कर दिए गए।
वर्ष 2025 में शासन द्वारा भंडारा जिले के लिए कुल 12 लाख 22 हजार 400 रुपये की राशि स्वीकृत की गई। इनमें से 12 लाख 5 हजार रुपये सीधे पीड़ितों के बैंक खातों में जमा किए जा चुके हैं। वर्तमान में 17 हजार 400 रुपये शेष हैं तथा 31 मामलों में निधि वितरण की प्रक्रिया अंतिम चरण में है।
योजना के प्रावधान के अनुसार, आवेदन प्राप्त होने के सात दिनों के भीतर 30 हजार रुपये की प्राथमिक सहायता देने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि पीड़ितों के तत्काल चिकित्सा खर्च पूरे किए जा सकें।
संशोधित मनोधैर्य योजना के तहत बलात्कार, पॉक्सो और एसिड हमले के मामलों में पीड़ितों को 10 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता दी जाती है। इसमें एसिड के साथ-साथ पेट्रोल, डीजल या गैस जैसे ज्वलनशील पदार्थों से किए गए हमलों को भी शामिल किया गया है।
स्वीकृत कुल राशि का 25 प्रतिशत अंतरिम सहायता के रूप में तत्काल दिया जाता है, जबकि शेष राशि 10 वर्ष की अवधि के लिए सावधि जमा (एफडी) के रूप में बैंक में रखी जाती है, जिससे पीड़ित के भविष्य की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
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वर्षवार आंकड़े
2018 – 38
2019 – 44
2020 – 41
2021 – 28
2022 – 17
2023 – 10
2024 – 16
2025 – 40
आर्थिक मदद के साथ-साथ पीड़ितों को निःशुल्क परामर्श, चिकित्सा उपचार और कानूनी सहायता भी प्रदान की जाती है। इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी प्रधान जिला न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली समिति करती है। योजना का लाभ लेने के लिए एफआईआर की प्रति, न्यायालय में धारा 164 के तहत दर्ज बयान तथा चिकित्सीय प्रमाण अनिवार्य हैं।
जिला विधि सेवा प्राधिकरण के सचिव न्यायमूर्ति मिलिंदकुमार बुराडे ने कहा कि, यह योजना केवल न्याय दिलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि पीड़ितों के आर्थिक और मानसिक पुनर्वास को भी सुनिश्चित करती है। इससे उन्हें समाज में पुनः आत्मविश्वास के साथ जीवन जीने में बड़ी मदद मिल रही है।