भंडारा में जल जीवन मिशन पर फंड संकट, 291 जलापूर्ति योजनाएं अधूरी; गांवों में बढ़ा जल संकट का खतरा
भंडारा में 291 नल योजनाएं केंद्र से फंड न मिलने के कारण अधर में लटकी हैं। जल जीवन मिशन का सपना धुंधला, ग्रामीणों को जल संकट का सामना करना पड़ रहा है।
Bhandara water supply schemes: केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना जल जीवन मिशन जिले में बजट के अभाव के कारण लड़खड़ा गई है। ग्रामीण क्षेत्रों के हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुँचाने का लक्ष्य अब संकट में पहुंच गया है।
केंद्र सरकार के हिस्से की निधि पिछले दो वर्षों से बकाया होने के कारण जिले की लगभग 291 जलापूर्ति योजनाओं का काम बीच में ही रुक गया है। कुल 275 करोड़ रुपये के बजट में से केंद्र की राशि न मिलने के कारण अब ठेकेदारों ने भी काम बंद करने का रुख अपना लिया है।
जिला परिषद ग्रामीण जलापूर्ति विभाग ने इस मिशन के तहत जिले के 692 गांवों का चयन किया था। प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार, अब तक प्राप्त 174.47 करोड़ रुपये की निधि पूरी तरह खर्च की जा चुकी है। वर्तमान में 401 गांवों की योजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जबकि 291 योजनाएं प्रगति पथ पर अटकी हुई हैं।
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फंड की कमी की वजह से 241 योजनाओं का भुगतान लंबे समय से लंबित पड़ा है। नियमों के मुताबिक इस योजना में 45 प्रतिशत हिस्सा केंद्र और 45 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार वहन करती है।
वर्ष 2025-26 के लिए राज्य सरकार का 18.39 करोड़ रुपये का हिस्सा प्राप्त होकर खर्च भी हो चुका है, लेकिन केंद्र की राशि न आने से काम आगे नहीं बढ़ पा रहा है।
ग्रामीण इलाकों में पाइपलाइन बिछाने के लिए सड़कें तो खोद दी गई हैं, लेकिन बजट के अभाव में उनकी मरम्मत नहीं हो सकी है। कई गांवों में पानी की टंकियां खड़ी हो चुकी हैं, लेकिन पाइपलाइन और नल कनेक्शन न होने से वे केवल शोपीस बनकर रह गई हैं।
भीषण जल संकट का सामना संभव मार्च की शुरुआत के साथ ही जिले में तापमान बढ़ने लगा है और ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की किल्लत महसूस की जा रही है। ऐसी स्थिति में अधूरी पड़ी योजनाएं ग्रामीणों की मुश्किलों को और बढ़ा रही हैं।
ठेकेदारों का कहना है कि बकाया भुगतान न होने से वे काम जारी रखने में असमर्थ हैं। यदि केंद्र सरकार की निधि जल्द प्राप्त नहीं हुई, तो इस साल भंडारा के ग्रामीण अंचलों को भीषण जल संकट का सामना करना पड़ सकता है।
वरिष्ठ स्तर पर जारी है प्रयास
अब तक 401 योजनाएं सफलतापूर्वक पूरी की गई हैं। प्रगति पर मौजूद 291 योजनाओं के लिए राज्य का हिस्सा अभी भी लंबित है।
