भंडारा जिले में राज्यव्यापी हड़ताल का असर, कार्यालयों में सन्नाटा कर्मचारियों के प्रदर्शन से गूंजा परिसर
भंडारा जिले में राज्यव्यापी हड़ताल का असर साफ दिखाई दे रहा है। कर्मचारियों की मांगों को लेकर प्रदर्शन, आम नागरिकों को परेशानी।
Bhandara News: राज्य सरकारी और अर्द्धसरकारी कर्मचारियों की लंबित मांगों को लेकर शुरू हुई राज्यव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल का असर भंडारा जिले में साफ दिखाई दे रहा है. जिले के भंडारा, लाखनी, साकोली, पवनी, मोहाडी, तुमसर और लाखांदुर तहसील कार्यालयों के कर्मचारी हड़ताल पर चले गए हैं, जिससे सभी कार्यालयों में सन्नाटा पसरा हुआ है.
एक ओर कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर तहसील कार्यालयों के बाहर जोरदार प्रदर्शन कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कामकाज ठप होने से आम नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. कर्मचारियों का प्रदर्शन और प्रमुख मांगेंसुबह कार्यालय समय शुरू होते ही कर्मचारियों ने कामकाज बंद कर तहसील कार्यालयों के प्रवेश द्वार पर एकत्र होकर नारेबाजी की.
उनकी प्रमुख मांगों में पुरानी पेंशन योजना लागू करना, रिक्त पदों को भरना और संविदा कर्मचारियों को नियमित करना शामिल है. कर्मचारी संगठनों के नेताओं का कहना है कि सरकार बारबार आश्वासन देती है, लेकिन मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लेती, जिससे उन्हें हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ा.
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प्रशासनिक कामकाज पूरी तरह ठपहड़ताल के चलते तहसील कार्यालयों के राजस्व विभाग, संजय गांधी निराधार योजना, आपूर्ति विभाग और सेतु केंद्र जैसे महत्वपूर्ण विभागों में कामकाज पूरी तरह बंद रहा. कर्मचारियों की कुर्सियां खाली नजर आईं और फाइलों का काम ठप पड़ गया. इससे जाति प्रमाणपत्र, भूमि फेरफार, दस्तावेज और अन्य जरूरी कार्यों के लिए आए लोगों को बिना काम कराए लौटना पड़ा.
नागरिकों और किसानों में आक्रोशजिले में इस समय कृषि कार्य और विभिन्न शासकीय योजनाओं की प्रक्रिया चल रही है. कई किसान दूरदराज के गांवों से सातबारा उतारा और सहायता राशि के लिए तहसील पहुंचे, लेकिन हड़ताल की वजह से उन्हें निराश लौटना पड़ा. लाखनी तहसील में एक वृद्ध किसान ने कहा, हम कई दिनों से चक्कर काट रहे हैं, आज भी काम नहीं हुआ. आखिर हमारी समस्या कौन सुनेगा.
योजनाओं के लाभार्थियों पर असरनिराधार, श्रावणबाल योजना और राशन कार्ड से जुड़े कार्यों के लिए आए महिलाओं और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा परेशानी हुई. कार्यालयों में मार्गदर्शन के लिए कोई कर्मचारी मौजूद नहीं था, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ गई. हड़ताल को लेकर जिले में राजनीतिक हलचल भी तेज हो गई है. कई जनप्रतिनिधियों ने कर्मचारियों की मांगों को उचित बताते हुए सरकार से जल्द समाधान निकालने की अपील की है, वहीं आम जनता को हो रही परेशानी पर चिंता जताई है.
