भंडारा में NH-53 अप्रोच रोड के DPR पर गहराया संदेह, 100 साल पुराने पेड़ों की कटाई पर अब फिर से होगा नया सर्वे
Bhandara News: भंडारा में NH-53 अप्रोच रोड के DPR पर उठे सवालों के बाद जिलाधिकारी सावन कुमार ने नए सर्वे के आदेश दिए। शताब्दी पुराने पेड़ों की कटाई को लेकर पर्यावरण प्रेमियों में आक्रोश।
Bhandara NH-53 Road Widening News: राष्ट्रीय राजमार्ग 53 पर मुजबी से कारधा नाका तक प्रस्तावित चौड़ीकरण कार्य को लेकर किए गए सर्वेक्षण पर अब गंभीर सवाल उठने लगे हैं। साथ ही वृक्ष कटाई से पहले पर्यावरणीय प्रभावों का समुचित आकलन EIA किया गया था या नहीं, इस पर स्पष्टता नहीं है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस परियोजना में नगर परिषद के 96 तथा वन विभाग के 30 पेड़ों को काटने का प्रस्ताव था। अब तक फुलमोगरा से जिला परिषद चौक तक करीब 40 पेड़ों की कटाई की जा चुकी है। इनमें कई पेड़ शताब्दी पुराने बताए जा रहे हैं। पर्यावरण प्रेमियों का आरोप है कि इस अंधाधुंध कटाई से पर्यावरण संतुलन बिगड़ रहा है और इसके दीर्घकालिक दुष्परिणाम सामने आ सकते हैं।
राष्ट्रीय राजमार्ग चौपदरीकरण परियोजना के प्रबंधक समीर परमार के अनुसार, इस मार्ग के लिए वर्ष 2017 में विस्तृत परियोजना रिपोर्ट डीपीआर तैयार की गई थी। बाद में इसका संशोधित डीपीआर भी तैयार किया गया। हालांकि, दोनों रिपोर्टों के बीच क्या बदलाव किए गए, इस बारे में स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है, जिससे संदेह और गहरा गया है।
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विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के प्रोजेक्ट में यातायात घनत्व, सड़क की चौड़ाई, भूमि अधिग्रहण, पर्यावरणीय प्रभाव, वृक्ष संरक्षण और स्थानीय भौगोलिक स्थिति जैसे कई पहलुओं का गहन अध्ययन जरूरी होता है। इसके लिए नेटवर्क सर्वे व्हीकल, उपग्रह मापन और ड्रोन सर्वे जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाता है। लेकिन स्थानीय लोगों का सवाल है कि क्या इन सभी मानकों का सही तरीके से पालन किया गया।
सबसे बड़ा प्रश्न यह उठ रहा है कि सड़क से दूर स्थित बड़े वृक्षों को भी क्यों काटा गया। पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि वैकल्पिक डिजाइन, जैसे सर्विस रोड या मार्ग परिवर्तन के जरिए इन पेड़ों को बचाया जा सकता था। कटाई किए गए पेड़ों में नीम, बबूल, सिसम और सागौन जैसे पर्यावरण के लिए महत्वपूर्ण वृक्ष शामिल हैं। इनकी कटाई से न केवल हरित आवरण कम हुआ है, बल्कि तापमान वृद्धि, धूल प्रदूषण और जैव विविधता पर भी नकारात्मक असर पड़ने की आशंका है।
नागरिकों ने संशोधित डीपीआर में वृक्ष कटाई से संबंधित बदलावों की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है। कराएंगे नया सर्वे कलेक्टर सावन कुमार इस संबंध में जिलाधिकारी सावन कुमार ने कहा कि फुलमोगरा से कारधा नाका मार्ग पर हुई वृक्ष कटाई स्पष्ट है, लेकिन यह तकनीकी आवश्यकता थी या योजना में कमी, इसका पता लगाने के लिए डीपीआर और पर्यावरण मंजूरी की जांच की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि पुराने सर्वे का पुनर्मूल्यांकन कर नया सर्वे कराया जाएगा और बड़े पेड़ों को बचाने के लिए वैकल्पिक डिजाइन पर विचार किया जाएगा।
