Bhandara News: खूनपसीना एक कर साल भर मेहनत की, लेकिन न तो कुदरत ने रहम किया और न ही बाजार ने दाम दिया. तुमसर तहसील के तामसवाडी निवासी टमाटर उत्पादक किसान चुन्नीलाल बारबैले की व्यथा आज हर सब्जी उत्पादक की हकीकत बन गई है. बाजार में टमाटर के दाम कौड़ियों के भाव होने और फसल की तोड़ाई का खर्च भी जेब से भरने की नौबत आने के बाद, उद्विग्न होकर इस किसान ने अपनी खड़ी फसल में मवेशी छोड़ दिए हैं.
आवक बढ़ने से दाम घटेपिछले कुछ दिनों से बाजार में टमाटर की आवक में भारी उछाल आया है, जिससे थोक मंडियों में कीमतें औंधे मुंह गिर गई हैं. व्यापारियों ने 30 किलो के एक क्रेट के लिए महज 150 रुपये का भाव लगाया, यानी करीब 5 रुपये प्रति किलो. खुदरा बाजार में भी स्थिति ऐसी ही बनी हुई है, जिससे लागत निकलना तो दूर, किसानों के हाथ में कुछ भी नहीं बच रहा है.
किसान के अनुसार, टमाटर की तोड़ाई के लिए लगने वाली मजदूरी और मंडी तक ले जाने का परिवहन खर्च मिलाकर जो लागत आती है, बिक्री से होने वाली आय उससे भी काफी कम है. रहीसही कसर पिछले तीन दिनों से जारी बेमौसम बारिश ने पूरी कर दी, जिससे बड़े पैमाने पर फसल खराब हो गई. किसानों में इस बात को लेकर भारी रोष है कि जो निवाला मुंह तक आया था, उसे पहले कुदरत ने छीना और जो बचा उसे बाजार खा गया.
अब घाटे का सौदाटमाटर तोड़कर बाजार ले जाना अब घाटे का सौदा है. लागत तो छोड़िए, मजदूरी के पैसे भी जेब से देने पड़ रहे हैं. ऐसी स्थिति में क्या करें आखिर में मवेशियों को चारे के रूप में यह टमाटर खिलाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा. सरकार को सब्जी उत्पादकों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य या मुआवजे की व्यवस्था करनी चाहिए.