

Bhandara Zilla Parishad-Panchayat Samiti Election: भंडारा जिला परिषद और पंचायत समिति की वर्तमान सत्ता का कार्यकाल अब समाप्ति की ओर बढ़ रहा है। 9 मई 2027 को वर्तमान कार्यकाल समाप्त होने में केवल 7 माह का समय शेष बचा है। नियमानुसार इस तिथि से पूर्व ही भंडारा जिला परिषद और जिले की सभी पंचायत समितियों के चुनाव संपन्न कराए जाने हैं। राजनीतिक सरगर्मियां शांत नजर आ रही हैं, लेकिन पर्दे के पीछे सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने अपनी रणनीतिक तैयारियां शुरू कर दी हैं।
हालांकि राज्य स्तर पर महायुति और महाविकास आघाड़ी के बीच सीधा मुकाबला है, परंतु स्थानीय निकाय स्तर पर स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार दल अपने बलबूते चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं। यदि चुनाव के बाद किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता है, तो सत्ता प्राप्ति के लिए जोड़-तोड़ का खेल तय माना जा रहा है।
चुनाव में अभी कुछ समय शेष रहने के कारण कई प्रशासनिक व राजनीतिक सवाल सामने आ रहे हैं। पिछले चुनाव में भंडारा जिला परिषद की 52 और पंचायत समितियों की कुल 104 सीटें थीं। चुनावी क्षेत्रों का नए सिरे से परिसीमन होगा अथवा पुराने निर्वाचन क्षेत्र ही बरकरार रहेंगे, इन प्रश्नों का उत्तर आने वाले समय में चुनावी प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही स्पष्ट हो सकेगा।
वर्ष 2022 के जिला परिषद चुनाव में कुल 52 सीटों में से कांग्रेस को 21, राष्ट्रवादी कांग्रेस को 13, भाजपा को शिवसेना को 1, वंचित बहुजन आघाड़ी को 1, बहुजन समाज पार्टी को 1 तथा निर्दलीय उम्मीदवारों को 2 सीटें मिली थीं बहमत के लिए 12, आवश्यक 26 का आंकड़ा जुटाने के लिए कांग्रेस ने भाजपा के बागी घड़े और निर्दलीय के सहयोग से गंगाधर जिभकाटे को अध्यक्ष बनाया था। इसके बाद जनवरी 2025 में हुए सियासी फेरबदल के दौरान कांग्रेस की कविता जगदीश उईके निर्विरोध अध्यक्ष चुनी गईं, जो जिला परिषद के 62 वर्षों के इतिहास में अध्यक्ष बनने वाली अनुसूचित जनजाति वर्ग की पहली महिला है।
आगामी चुनाव को देखते हुए कांग्रेस और भाजपा जैसे प्रमुख दलों ने युवाओं के हाथों में कमान सौंपी है। भाजपा ने जिलाध्यक्ष के रूप में युवा नेता आशु गोंडाणे लगातार सक्रिय बने हुए है, जो लगातार जिले के विभिन्न क्षेत्रों में सक्रियता बनाए हुए हैं। वहीं कांग्रेस ने युवा मुकंद साखरकर को जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी है। हालांकि उनकी राह आसान नहीं है। कांग्रेस में प्रदेश स्तर के वरिष्ठ नेता नाना पटोले की भूमिका बेहद अहम रहेगी, जिनके मार्गदर्शन में पार्टी रणनीति तैयार करेगी।