उदासीनता 70 फीसदी युवा अब भी पूंजी के इंतजार में, युवाओं के उद्यमी बनने में बैंकों का अडंगा
Bhandara Bank Loan Issues News: भंडारा जिले में मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार सृजन योजना के तहत युवाओं के उद्यमी बनने में बैंकिंग प्रक्रिया की देरी के कारण 70 प्रतिशत आवेदन लंबित हैं।
Youth Unemployment (सोर्सः फाइल फोटो- सोशल मीडिया)
Bhandara Youth Unemployment News: भंडारा जिले में स्वरोजगार के माध्यम से आत्मनिर्भर बनने का सपना देख रहे सैकड़ों युवाओं के उत्साह पर बैंकों की कार्यप्रणाली पानी फेर रही है। जिले के शिक्षित बेरोजगारों को अपना खुद का व्यवसाय शुरू करने के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से शुरू की गई मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार सृजन योजना वर्तमान में बैंकिंग तंत्र की सुस्ती के कारण अधर में लटकी नजर आ रही है।
वर्ष 202526 के ताजा आंकड़ों का विश्लेषण करें तो स्थिति काफी चिंताजनक है। जिले के कुल 1,705 युवाओं ने विभिन्न छोटेबड़े उद्योगों के लिए ऋण के प्रस्ताव प्रशासन के माध्यम से बैंकों को भेजे थे। उम्मीद थी कि इन युवाओं के प्रोजेक्ट्स को समय पर पूंजी मिलेगी, लेकिन अब तक बैंकों ने केवल 505 आवेदनों को ही स्वीकृति प्रदान की है। इसका सीधा अर्थ यह है कि लगभग 70 प्रतिशत पात्र युवा आज भी केवल बैंक के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
कुल आवेदन 1,705 स्वीकृत प्रस्ताव
इस योजना के तहत जिले के लिए 1,000 परियोजनाओं का वार्षिक लक्ष्य रखा गया है। इसे पूरा करने के लिए अभी भी 495 मंजूरियों की जरूरत है। वित्तीय दृष्टिकोण से देखें तो इन 1,705 आवेदकों के प्रोजेक्ट्स की कुल लागत 109 करोड़ रुपये से अधिक है, लेकिन बैंकों ने अब तक मात्र 16 करोड़ 2 लाख 95 हजार 828 रुपये के निवेश को ही मंजूरी दी है। यह आंकड़ा बताता है कि जमीनी स्तर पर ऋण वितरण की स्थिति कितनी गंभीर है।
सम्बंधित ख़बरें
छात्राओं को आपत्तिजनक सामग्री भेजने के आरोप में क्लर्क निलंबित, वर्धा हिंदी विश्वविद्यालय में बड़ा विवाद सामने
गड़चिरोली में 68 लाख का गांजा जब्त, खेत में धान की जगह हो रही थी गांजे की खेती
शादी के तीन महीने बाद ही उजड़ गया परिवार, वरुडा हाईवे पर बस की टक्कर से पति-पत्नी की मौत
अमरावती में नाबालिग से दरिंदगी का बड़ा मामला, 8 आरोपियों पर POCSO के तहत केस दर्ज
निजी क्षेत्र के बैंकों का रवैया निराशाजनक
योजना के क्रियान्वयन में निजी क्षेत्र के बैंकों का रवैया सबसे निराशाजनक रहा है। एचडीएफसी और आईसीआईसीआई जैसे बड़े कॉर्पोरेट बैंकों ने इस सामाजिक सरोकार की योजना में अभी तक अपना खाता तक नहीं खोला है। वहीं, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में बैंक ऑफ इंडिया 144 मंजूरियों के साथ सबसे आगे है, जबकि भारतीय स्टेट बैंक ने 142 प्रस्तावों को स्वीकृत किया है। यूनियन बैंक ने 52 और बैंक ऑफ महाराष्ट्र ने 34 युवाओं के प्रस्ताव पास किए हैं।
ये भी पढ़े: भीमा शुगर कारखाने में प्रशासक नियुक्त, विधायक राहुल कुल गुट को हाईकोर्ट से बड़ा झटका
जटिल प्रक्रिया बनी बड़ी बाधा
उद्यमियों का आरोप है कि बैंक ऋण देने के लिए सिबिल स्कोर की कड़ी शर्तें, अनावश्यक जमानतदारों की मांग और दस्तावेजों की लंबी प्रक्रिया जैसी अड़चनें पैदा कर रहे हैं। उत्पादन क्षेत्र के लिए 50 लाख और सेवा क्षेत्र के लिए 20 लाख रुपये तक की ऋण सीमा वाली इस योजना में सरकार की ओर से 35 प्रतिशत तक की सब्सिडी का प्रावधान है, फिर भी बैंक इस योजना को लेकर उदासीन बने हुए हैं। स्थानीय युवाओं का कहना है कि यदि बैंकों का यही रवैया रहा, तो जिले में बेरोजगारी की समस्या और विकराल हो जाएगी।
जल्द मंजूरी का प्रयास
जिला अग्रणी बैंक प्रबंधक राजू नंदनवार ने कहा कि बैंकों से लगातार समन्वय कर पात्र उम्मीदवारों के प्रस्तावों को जल्द से जल्द मंजूरी देने का प्रयास किया जा रहा है ताकि शिक्षित युवा केवल नौकरी के पीछे न भागकर खुद का उद्योग खड़ा कर सकें।
