भंडारा में जल संकट गहराया, सोमलवाड़ा के ग्रामीण 25 वर्षों से पेयजल समस्या से परेशान
Har Ghar Jal Scheme: भंडारा जिले में एक ओर लाखनी तहसील के सोमलवाड़ा गांव के ग्रामीण वर्षों से पेयजल संकट का सामना कर रहे हैं, वहीं विश्व पर्यावरण दिवस पर देशी वृक्षारोपण का संदेश दिया गया।
Drinking Water Problem (सोर्सः फाइल फोटो- सोशल मीडिया)
Somalwada Water Crisis: लाखनी तहसील के सोमलवाड़ा गांव में भीषण गर्मी के बीच महिलाओं और ग्रामीणों को पानी के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है। हर घर नल, हर घर जल जैसी योजनाएं क्षेत्र में प्रभावी साबित नहीं हुई हैं और स्थिति यह है कि करीब 25 वर्षों से चली आ रही पेयजल समस्या का समाधान नहीं हो पाया है। ग्राम पंचायत की ओर से कई बार संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों से जवाब मांगा गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर सिल्ली के पर्यावरण प्रेमी पद्माकर डुंभरे ने लोगों से अपने गांव और आसपास के क्षेत्रों में देशी वृक्ष लगाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में प्रकृति को देवतुल्य माना गया है और वसुधैव कुटुंबकम का सिद्धांत संपूर्ण प्रकृति पर लागू होता है।
पर्यावरण संरक्षण के लिए देशी वृक्ष लगाएं
देशी वृक्ष स्थानीय जलवायु के अनुरूप होते हैं तथा उन्हें कम पानी की आवश्यकता होती है। बरगद, पीपल, नीम, आम और सागौन जैसे वृक्ष अधिक ऑक्सीजन और घनी छाया प्रदान करते हैं। वहीं नीम, आंवला, बेल, अर्जुन, बेहड़ा और हरड़ जैसे वृक्ष औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं। इनके रोपण से जैव विविधता का संरक्षण भी संभव हैनाली का टूटा ढक्कन
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पवनी के जवाहर गेट के पास स्थित नाली का ढक्कन टूट जाने से लोगों की सुरक्षा पर खतरा मंडरा रहा है। गुरुवार सुबह एक महिला इसमें गिरकर घायल हो गई। स्थानीय नागरिकों ने नगर परिषद प्रशासन से तत्काल मरम्मत कर नया ढक्कन लगाने की मांग की है, ताकि भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं को रोका जा सके।
प्रगणकों को दे दोगुना भत्ता
देशव्यापी जनगणना अभियान के दौरान एक प्रगणक के जिम्मे सामान्यतः 150 से 200 घर होने चाहिए। लेकिन कई ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में कुछ प्रगणकों को 400 से अधिक घरों का कार्यभार सौंपा गया है। शिक्षक एवं कर्मचारी संगठनों ने मांग की है कि ऐसे प्रगणकों को विशेष मामले के रूप में दोगुना भत्ता दिया जाए। उनका कहना है कि घरों की क्रम संख्या, आंकड़ा संग्रह, मोबाइल ऐप पर जानकारी दर्ज करने, सत्यापन और नागरिकों से संपर्क जैसे कार्यों में अतिरिक्त समय और श्रम लग रहा है।
