तुमसर में भूख हड़ताल बैठे उपसरपंच व अन्य (सोर्स: सोशल मीडिया)
Tumsar Hunger Strike News: महाराष्ट्र के भंडारा जिले की तुमसर तहसील में प्रशासन की एक कथित ‘तकनीकी चूक’ ने सैकड़ों ग्रामीणों के चूल्हे ठंडे कर दिए हैं। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (MGNREGA) के तहत काम करने वाले मजदूरों को उनके पसीने की कमाई नहीं मिली है। इस अन्याय के खिलाफ परसवाड़ा गांव के उपसरपंच पवन खवास पिछले तीन दिनों से पंचायत समिति (पंस) कार्यालय के सामने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें व्यक्तिगत लाभ की योजनाओं, जैसे सिंचाई कुएं और पशु शेड के निर्माण का काम दिया गया था। खंड विकास अधिकारी (BDO) द्वारा इन कार्यों को प्रशासकीय स्वीकृति दी गई थी और तकनीकी मंजूरी के बाद ही काम शुरू हुआ था। काम पूरा हुए महीनों बीत गए, लेकिन जब भुगतान की बारी आई, तो प्रशासन ने हाथ खड़े कर लिए हैं।
वर्तमान बीडीओ का कहना है कि पूर्व अधिकारी ने 60:40 का अनुपात बनाए बिना ही अतिरिक्त काम अलॉट कर दिए थे। नियम के उल्लंघन के कारण अब फंड जारी करना मुश्किल हो रहा है। सवाल यह उठता है कि अगर अधिकारियों ने नियम तोड़े, तो उसकी सजा उन गरीब किसानों और मजदूरों को क्यों दी जा रही है जिन्होंने अपना काम ईमानदारी से पूरा किया है?
अनशनकारी पवन खवास की हालत बिगड़ने के बावजूद प्रशासन की ओर से कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला है। उनके समर्थन में पूर्व सरपंच सारिका कोटपल्लीवार, नरेंद्र ठाकरे, स्वराज्य युवा एकता फाउंडेशन के अमित मेश्राम और कई अन्य ग्राम पंचायतों के प्रतिनिधि भी मैदान में उतर आए हैं। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही ‘रोगायो’ (रोजगार गारंटी योजना) के तहत किए गए कामों का भुगतान नहीं हुआ, तो यह आंदोलन उग्र रूप ले सकता है।