

Bhandara Food Supply Department: भंडारा जिले की सार्वजनिक वितरण प्रणाली में पारदर्शिता बनाए रखने तथा कालाबाजारी और उपभोक्ताओं के साथ धोखाधड़ी रोकने के लिए खाद्य एवं आपूर्ति विभाग द्वारा राशन दुकानों की जांच की जा रही है। जांच के दौरान अनियमितता पाए जाने पर संबंधित विक्रेताओं के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
हालांकि उपलब्ध जांच आंकड़ों के अनुसार जिले की कुल 890 उचित मूल्य दुकानों में से अब तक केवल 143 दुकानों की ही जांच की गई है। इनमें से तीन दुकानों में मामूली खामियां मिलीं, जिन पर कार्रवाई करते हुए कुल 15 हजार 225 रुपए का जुर्माना वसूला गया है। खास बात यह है कि जांच अभियान के दौरान किसी भी दुकान में मध्यम या गंभीर स्तर की अनियमितता नहीं मिली।
वहीं, किसी भी दुकान का लाइसेंस निलंबित या रद्द नहीं किया गया है। जिले में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत कुल 890 उचित मूल्य दुकानें संचालित हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार इनमें से 143 दुकानों की नियमित जांच की गई है। वहीं, आकस्मिक जांच तथा शिकायत के आधार पर की गई जांच की संख्या शून्य है। इस तरह अब तक कुल 143 दुकानों की ही जांच हो सकी है।
उचित मूल्य दुकानों से पात्र लाभार्थियों को शासन के नियमानुसार अनाज मिल रहा है या नहीं, दुकान में उपलब्ध स्टॉक और वितरण प्रक्रिया में पारदर्शिता है या नहीं, इसकी जांच के लिए विभाग द्वारा निरीक्षण किया जाता है। इस दौरान दुकान में मौजूद वास्तविक स्टॉक और रिकॉर्ड में दर्ज स्टॉक, ई-पॉस मशीन का उपयोग, लाभार्थियों को वितरित किया जाने वाला अनाज, वजन, मूल्य सूची तथा आवश्यक रजिस्टरों की।
जिले की 890 उचित मूल्य दुकानों में से अब तक 143 दुकानों की जांच पूरी हुई है। ऐसे में 747 दुकानों की जांच अभी बाकी है। इन दुकानों की नियमित जांच कब तक पूरी होगी, इस पर अब नजर है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली में अनियमितताओं को रोकने के लिए नियमित जांच के साथ-साथ आकस्मिक तथा शिकायत आधारित जांच को भी प्रभावी बनाने की आवश्यकता है।
जांच की गई 143 दुकानों में से केवल तीन दुकानों में मामूली स्तर की खामिया पाई गई। मध्यम या गंभीर स्तर की अनियमितता का एक भी मामला सामने नहीं आया। मिली खामियों पर नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई करते हुए कुल 15 हजार 225 रुपए जुर्माना वसूला गया। गंभीर अनियमितता पाए जाने पर उचित मूल्य दुकान का लाइसेंस निलंबित या रद्द करने के साथ ही आवश्यकता के अनुसार कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है। हालांकि उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार इस अवधि में न तो किसी दुकान का लाइसेंस निलंबित या रद्द हुआ, न ही कोई मामला दर्ज किया गया और न ही किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी हुई। जब्त सामग्री की कीमत भी शून्य रही।
राशन दुकानों से लाभार्थियों को नियमानुसार अनाज मिले, वजन में किसी तरह की गड़बड़ी न हो, शासन द्वारा निर्धारित दरों की जानकारी उपभोक्ताओं को मिले और ई-पॉस प्रणाली का सही इस्तेमाल हो, इसके लिए नियमित जांच महत्वपूर्ण है। उपलब्ध आंकड़ों में बड़े स्तर के गैरकानूनी मामलों की जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन 890 दुकानों की तुलना में केवल 143 दुकानों की जांच होने से बाकी जरूरत है। दुकानों के निरीक्षण में तेजी लाने की सार्वजनिक वितरण प्रणाली में नागरिकों का विश्वास बनाए रखने के लिए नियमित निगरानी, पारदर्शिता और शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई जरूरी है।