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कृषि विभाग के उत्पादकता आकलन से भंडारा जिले के धान उत्पादक किसानों की चिंता बढ़ गई है।
किसानों को आशंका है कि कम उत्पादकता अनुमान के आधार पर सरकारी खरीदी का लक्ष्य कम हो सकता है।
स्थानीय स्तर पर कुछ किसान प्रति हेक्टेयर लगभग 40 क्विंटल धान उत्पादन की उम्मीद जता रहे हैं।
Bhandara Paddy Productivity: इस वर्ष अल नीनो के प्रभाव के चलते खरीफ सीजन में अपर्याप्त बारिश के कारण भंडारा जिले की कुछ तहसीलों में सूखे की स्थिति घोषित की गई है। इसी बीच कृषि विभाग द्वारा खरीफ धान की अनुमानित उत्पादकता प्रति हेक्टेयर 18 क्विंटल आंके जाने की जानकारी सामने आने से धान उत्पादक किसानों की चिंता बढ़ गई है।
किसानों को आशंका है कि कम उत्पादकता के अनुमान के आधार पर सरकारी धान खरीदी केंद्रों पर प्रति हेक्टेयर खरीदी का लक्ष्य घट सकता है। इससे किसानों को अपनी उपज का कुछ हिस्सा खुले बाजार में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से कम दर पर बेचने की नौबत आ सकती है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, जिले की कुछ तहसीलों में 75 मिमी से कम बारिश होने के कारण खरीफ फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई गई थी। इसके आधार पर सरकार ने प्रभावित तहसीलों में प्राथमिकता से सुखा घोषित किया। राजस्व प्रशासन ने फसल नुकसान का आकलन करने के लिए ग्राम राजस्व अधिकारी, कृषि सहायक और ग्राम पंचायत अधिकारियों की संयुक्त टीमों को पंचनामा करने के निर्देश दिए। इसके बाद खेतों में फसल क्षति का सर्वेक्षण शुरू किया गया।
लाखांदुर तहसील में सिंचाई सुविधाएं उपलब्ध होने से खरीफ धान की अच्छी पैदावार होने की उम्मीद है। कई क्षेत्रों में कृषि बिजली पंपों के माध्यम से सिंचाई की जा रही है। वहीं, कुछ क्षेत्रों में इटियाडोह और गोसीखुर्द बांध की बायीं नहर के पानी से भी फसलों को लाभ मिल रहा है। इसके चलते अधिकांश क्षेत्रों में धान की फसल संतोषजनक स्थिति में है। कुछ खेतों में फसल नुकसान के पंचनामे के दौरान क्षति शून्य दर्ज होने की स्थिति भी सामने आ रही है।
किसानों का कहना है कि यदि सरकारी खरीदी का लक्ष्य अनुमानित उत्पादकता के आधार पर तय किया गया, तो वे अपनी पूरी उपज सरकारी केंद्रों पर नहीं बेच पाएंगे। ऐसी स्थिति में उन्हें शेष धान खुले बाजार में कम कीमत पर बेचना पड़ सकता है। किसानों ने सरकार और प्रशासन से वास्तविक फसली स्थिति के आधार पर उत्पादकता का पुनर्मूल्यांकन करने तथा उसी के अनुसार सरकारी धान खरीदी का लक्ष्य निर्धारित करने की मांग की है, ताकि उन्हें उपज का उचित मूल्य मिल सके।
कुछ समय पहले धान की फसल पर कीट और रोगों का प्रकोप देखा गया था। किसानों ने कीटनाशकों का छिड़काव कर इस पर नियंत्रण पाने का प्रयास किया। फिलहाल कुछ क्षेत्रों में तुड़तुड़ा कीट का सीमित प्रकोप है। किसान इसके नियंत्रण के लिए आवश्यक उपाय कर रहे है। स्थानीय स्तर पर इस वर्ष प्रति हेक्टेयर लगभग 40 क्विंटल धान उत्पादन की उम्मीद जताई जा रही है। ऐसे में कृषि विभाग का 18 क्विंटल उत्पादकता का अनुमान किसानों की चिंता बढ़ा रहा है।