अमरावती में सरकारी कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल, पहले दिन ही ठप पड़े दफ्तर और स्कूल
Amravati News: सरकारी और निम सरकारी कर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल ने पूरे प्रदेश में कामकाज को ठप कर दिया है, जिससे आम जनता को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
Amravati Strike Government Employees: राज्य के सरकारी, निम सरकारी कर्मचारी और विभिन्न शिक्षक संगठनों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर मंगलवार, 21 अप्रैल से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। हड़ताल के पहले ही दिन इसका व्यापक असर देखने को मिला, जिससे पूरे प्रदेश में जनजीवन प्रभावित हुआ।
सुबह कार्यालय खुलने के समय कर्मचारी दफ्तरों में प्रवेश करने के बजाय बाहर एकत्रित होकर नारेबाजी करते नजर आए। कलेक्ट्रेट, तहसील, आरटीओ और रजिस्ट्री कार्यालयों में सन्नाटा पसरा रहा। मेजें खाली और कुर्सियां सूनी दिखाई दीं। दूर-दराज से अपने काम के लिए आए नागरिकों को निराश होकर लौटना पड़ा।
राजस्व विभाग से जुड़े कार्य पूरी तरह ठप रहे, जिससे जाति प्रमाणपत्र, आय प्रमाणपत्र और भूमि से संबंधित जरूरी काम अटक गए। हड़ताल का असर शिक्षा क्षेत्र पर भी साफ दिखा। शिक्षकों की सक्रिय भागीदारी के कारण सरकारी और अनुदानित स्कूलों में पढ़ाई पूरी तरह बंद रही।
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लंबित मांगों को लेकर आंदोलन तेज
कर्मचारी संगठनों की प्रमुख मांगों में पुरानी पेंशन योजना लागू करना, कैशलेस उपचार सुविधा, रिक्त पदों को भरना और विभागीय परीक्षा के पैटर्न में बदलाव शामिल हैं। सरकारी-निम सरकारी, शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारी समन्वय समिति के बैनर तले यह आंदोलन किया जा रहा है।
शिक्षक संगठनों की भी बड़ी भागीदारी
इस बेमियादी हड़ताल में महाराष्ट्र राज्य माध्यमिक शिक्षक महामंडल से जुड़ी प्रमुख संस्थाएं विदर्भ माध्यमिक शिक्षक संघ, मराठवाड़ा शिक्षक संघ और महाराष्ट्र राज्य माध्यमिक शिक्षक संघ फेडरेशन के पदाधिकारी और सदस्य भी शामिल हैं।
महामंडल के महासचिव व पूर्व विधायक वी.यू. डायगव्हाणे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को औपचारिक नोटिस भेजकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं।
शिक्षक संगठनों की प्रमुख मांगों में टीईटी उत्तीर्ण करने की अनिवार्यता समाप्त करना, 15 मार्च 2024 के संच मान्यता आदेश को वापस लेना, सभी कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना लागू करना, अतिरिक्त घोषित शिक्षकों और शून्य शिक्षक वाले स्कूलों के लिए स्पष्ट नीति बनाना, 10-20-30 वर्ष की सेवांतर्गत प्रगति योजना लागू करना और सेवानिवृत्ति आयु सीमा बढ़ाकर 60 वर्ष करना शामिल है।
आम जनता सबसे ज्यादा प्रभावित
हड़ताल के चलते सबसे अधिक परेशानी आम नागरिकों को झेलनी पड़ रही है। सरकारी दफ्तरों के कामकाज बंद होने से लोगों के जरूरी काम अटक गए हैं। यदि हड़ताल लंबी चली, तो इसका असर और अधिक गहराने की संभावना है।
