भंडारा शहर से सटे गांवों का होगा कायाकल्प: नई नगर परिषद के गठन की हलचल तेज; बीडीओ को 12 फरवरी को जारी हुआ पत्र
Bhandara New Municipal Council: भंडारा में 15 गांवों को मिलाकर बनेगी दूसरी नगर परिषद। विधायक नरेंद्र भोंडेकर की पहल पर प्रशासन ने शुरू की प्रक्रिया। गणेशपुर और खोकरला जैसे बड़े गांव होंगे शामिल।
- Written By: प्रिया जैस
भंडारा न्यूज
Maharashtra Urban Development Dept: भंडारा जिला मुख्यालय भंडारा से सटे और तेजी से शहरीकरण की ओर बढ़ रहे 15 प्रमुख ग्राम पंचायतों के लिए एक दूरगामी प्रभाव वाली खबर सामने आई है। पिछले कई वर्षों से लंबित सीमा विस्तार और स्वतंत्र नागरिक प्रशासन का मुद्दा अब सुलझने की राह पर दिखाई दे रहा है। खोकरला और गणेशपुर जैसे विशाल ग्रामीण क्षेत्रों सहित कुल 15 गांवों को मिलाकर एक स्वतंत्र नई नगर परिषद के गठन की प्रशासनिक हलचलें जिला स्तर पर तेज हो गई हैं।
भंडारा के विधायक नरेंद्र भोंडेकर इन गांवों में बढ़ते नागरिक घनत्व और बुनियादी सुविधाओं के अभाव को लेकर निरंतर प्रयासरत रहे हैं। उन्होंने शासन और प्रशासन के समक्ष यह तर्क रखा था कि इन गांवों का विस्तार अब ग्राम पंचायत की सीमित निधि और प्रशासनिक क्षमता से बाहर हो चुका है। शहरी स्वरूप ले चुके इन क्षेत्रों के समग्र विकास के लिए एक स्वतंत्र नगर निकाय अनिवार्य है।
प्रक्रिया को गति देने के दिए निर्देश
उनके इस निरंतर पत्र व्यवहार और विधानसभा में उठाए गए मुद्दों का संज्ञान लेते हुए महाराष्ट्र सरकार के नगर विकास विभाग ने प्रक्रिया को गति देने के निर्देश दिए हैं। प्रस्तावित नई नगर परिषद में भंडारा तहसील के वे क्षेत्र शामिल हैं जो लगभग शहर का हिस्सा बन चुके हैं।
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इनमें प्रमुख रूप से खोकरला, गणेशपुर, केसलवाड़ा, टवेपार/खुशिपार, पंढराबोडी, सिरसी, जमनी, भोजापुर, बेला, पिंडकेपार, मुजबी, संगम और खैरी/सालेबर्डी शामिल हैं। यदि यह प्रस्ताव मूर्त रूप लेता है, तो एक विशाल नियोजित शहरी क्षेत्र अस्तित्व में आएगा, जिससे केंद्र और राज्य सरकार की बड़ी विकास योजनाओं का मार्ग प्रशस्त होगा।
प्रशासनिक प्रक्रिया और तकनीकी रिपोर्ट
जिला परिषद के उपमुख्य कार्यकारी अधिकारी (पंचायत) उमेश नंदागवली ने इस संबंध में खंड विकास अधिकारी को एक पत्र 12 फरवरी को जारी कर तत्काल तकनीकी रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। महाराष्ट्र नगर परिषद, नगर पंचायत और औद्योगिक नगरी अधिनियम 1965 के तहत इस प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी के लिए सरकार को भेजा जाना है।
प्रशासन ने ग्राम पंचायतों से उनके सहमति प्रस्ताव, अनापत्ति प्रमाण पत्र, 2011 की जनगणना के आंकड़े और वर्तमान ग्राम पंचायत के कार्यकाल का विवरण मांगा है।वर्तमान में ये गांव ग्राम पंचायत प्रशासन के अधीन हैं, जहां विकास कार्यों के लिए फंड की उपलब्धता सीमित होती है।
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नगर परिषद बनने से इन क्षेत्रों को शहरी विकास के लिए सीधा और बड़ा बजट आवंटित होगा। इससे जल निकासी, नियोजित जलापूर्ति, कचरा प्रबंधन, आधुनिक स्ट्रीट लाइट और पक्की सड़कों जैसे कार्यों को गति मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भूखंडों के नियोजन और अवैध निर्माण पर भी अंकुश लग सकेगा।
सीमा विस्तार का विरोध और कानूनी चुनौतियां
इस विकासवादी कदम के बीच एक बड़ा सवाल जन सहमति का भी है। उल्लेखनीय है कि पूर्व में इनमें से अधिकांश ग्राम पंचायतों को भंडारा नगर परिषद में जोड़कर शहर का सीमा विस्तार करने की योजना बनाई गई थी। उस समय ग्राम पंचायतों ने कड़ा विरोध करते हुए भंडारा शहर में शामिल होने से इनकार कर दिया था। विरोध इतना प्रबल था कि मामला न्यायालय तक ले जाने की तैयारी कर ली गई थी।
अब जबकि एक स्वतंत्र नगर परिषद का प्रस्ताव है, प्रशासन के सामने चुनौती यह होगी कि क्या ये ग्राम पंचायतें इस नए ढांचे को स्वीकार करेंगी? ग्रामीण स्वायत्तता और शहरी टैक्स प्रणाली के बीच का यह संघर्ष इस योजना के भविष्य को तय करेगा। फिलहाल, प्रशासन युद्ध स्तर पर रिपोर्ट तैयार करने में जुटा है और गेंद अब संबंधित ग्राम पंचायतों के पाले में है।
