Bhandara Tree Cutting News: भंडारा तरक्की का पहिया जब घूमता है, तो अक्सर प्रकृति उसके नीचे कुचल दी जाती है। कुछ ऐसा ही नजारा भंडारा से मुजबी और बेला के बीच देखने को मिल रहा है, जहां फोरलेन सड़क के चौड़ाईकरण ने सदियों पुराने हरेभरे प्रहरियों की बलि लेना शुरू कर दिया है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण एनएचएआई के इस प्रोजेक्ट में 80 से 100 साल पुराने विशालकाय पेड़ों को मशीनों से बेरहमी से काटा जा रहा है।
लेकिन इस हरियाली संहार के बीच ग्रीन हेरिटेज पर्यावरण संस्था एक ढाल बनकर खड़ी हो गई है। सड़क चौड़ी करने के इस अभियान में एमएम गैरेज के सामने खड़ा एक ऐतिहासिक नीम का पेड़ भी निशाने पर था। जैसे ही वन विभाग की आरी इस बुजुर्ग पेड़ की ओर बढ़ी, ग्रीन हेरिटेज संस्था के संस्थापक सईद शेख, जयंत धनवलकर और पर्यावरण योद्धा मनीषा भांडारकर व रोशन भांडारकर ने मोर्चा संभाल लिया।
उन्होंने न केवल इस कटाई का कड़ा विरोध किया, बल्कि मौके पर पहुंचकर काम रुकवा दिया। अधिकारियों से पूछताछ में पता चला कि अभी तो सिर्फ 9 किलोमीटर कारधा से मुजबी का ट्रेलर है, पूरी पिक्चर यानी भंडारा से कारधा तक की भव्य वृक्षों की कतार अभी कटनी बाकी है। संस्था का सीधा सवाल है, क्या कांक्रीट के जंगल बनाने के लिए असली जंगलों को उजाड़ना ही एकमात्र रास्ता है?
पर्यावरण प्रेमियों ने एनएचएआई नागपुर को पत्र लिखकर केवल शिकायत नहीं की, बल्कि विकास और प्रकृति के बीच का रास्ता भी सुझाया है। इसमें 100 साल पुराना पेड़ भरपाई नई पौध लगाकर कभी नहीं हो सकती। पेड़ों को काटने के बजाय मशीनों से उखाड़कर दूसरी जगह शिफ्ट किया जाए। अगर पेड़ बीच में आ रहा है, तो उसे काटकर नहीं बल्कि उसे सेंट्रल डिवाइडर का हिस्सा बनाकर सड़क का डिजाइन बदलें।
भारतीय वन अधिनियम के तहत इन प्राचीन पेड़ों को विरासत मानकर संरक्षित करना प्रशासन की कानूनी जिम्मेदारी है। क्या फाइलों से बाहर निकलेगी हरियाली? राहत की बात यह है कि संस्था के संस्थापक सईद शेख ने जब एनएचएआई के तकनीकी सहायक विवेक गोमकाले से फोन पर लंबी चर्चा की, तो प्रशासन का रुख सकारात्मक दिखा।
गोमकाले ने पर्यावरण प्रेमियों की भावनाओं का सम्मान करते हुए आश्वासन दिया है कि वे पेड़ों को बचाने के विकल्पों पर गंभीरता से विचार करेंगे। अब देखना यह है कि प्रशासन विकास की रफ्तार में इन मूक प्रहरियों को जगह देता है या फिर ये विरासतें केवल कागजों और यादों में ही शेष रह जाएंगी।