मिनी ट्रैक्टर (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Maharashtra Agriculture Subsidy Scheme: कृषि क्षेत्र को आधुनिक बनाने और छोटे किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूती देने के लिए केंद्र व राज्य सरकारें निरंतर प्रयासरत हैं। इसी दिशा में मिनी ट्रैक्टर योजना छोटे और सीमांत किसानों के लिए मील का पत्थर साबित हो रही है।
महाराष्ट्र सरकार की ओर से अनुसूचित जाति और नवबौद्ध समाज के किसानों के लिए चलाई जा रही यह योजना बेहद लाभकारी है, लेकिन भंडारा जिले में इसके क्रियान्वयन की जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।
जिले में हर वर्ष पर्याप्त धन उपलब्ध न होने के कारण योजना की रफ्तार काफी धीमी है, जिसके चलते किसानों को ट्रैक्टर पाने के लिए वर्षों इंतजार करना पड़ रहा है। इस योजना के तहत एक मिनी ट्रैक्टर और उसके साथ खेती के आवश्यक उपकरणों की कुल लागत करीब 3.5 लाख रुपये तय की गई है। सरकार की ओर से इसमें 90 प्रतिशत यानी लगभग 3.15 लाख रुपये की भारी सब्सिडी प्रदान करती है।
लाभार्थी किसान या बचत समूह को केवल 10 प्रतिशत यानी 35,000 रुपये का योगदान देना होता है। यह सहायता राशि सीधे किसान के बैंक खाते में हस्तांतरित करती है। हालांकि, पिछले 7 वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो जिले को केवल 2 करोड़ 67 लाख 25 हजार रुपये ही प्राप्त हुए हैं। इसमें से अब तक 1 करोड़ 41 लाख 25 हजार रुपये खर्च कर 35 बचत समूहों को ट्रैक्टर बांटे गए हैं।
योजना की विडंबना यह है कि वित्तीय वर्ष 2020-21, 2021-22, 2023-24 और 2024-25 में जिले को एक भी रुपया आवंटित नहीं किया गया। इसका सीधा असर लाभार्थियों की संख्या पर पड़ा है। केवल 2019-20 में 10 और 2022-23 में 35 लाभार्थियों को लाभ मिला।
वर्तमान वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए शासन ने 1.26 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए हैं, जिससे 40 बचत समूहों को ट्रैक्टर देने की प्रक्रिया शुरू है। समाज कल्याण विभाग का कहना है कि 35 आवेदनों की त्रुटियां दूर करने का प्रयास किया जा रहा है ताकि उन्हें जल्द लाभ मिले।
अधिकांश किसानों के पास कम जमीन है, ऐसे में बड़े ट्रैक्टरों का खर्च उठाना उनके लिए संभव नहीं होता। मिनी ट्रैक्टर कम कीमत और किफायती रखरखाव के कारण छोटे किसानों की पहली पसंद है। इसके इंजन छोटे होने से ईंधन की खपत कम होती है और मरम्मत के लिए स्थानीय स्तर पर मिस्त्री आसानी से मिल जाते हैं।
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इसकी कॉम्पैक्ट बनावट छोटे खेतों, बागवानी और सब्जियों की खेती के लिए अत्यंत उपयोगी बनाती है। यह ट्रैक्टर संकरी पगडंडियों और असमतल जमीन पर भी सुगमता से काम करता है, जिससे समय और श्रम दोनों की बचत होती है।
| वित्तीय वर्ष | प्राप्त धन (लाख में) | लाभार्थी संख्या | स्थिति |
| 2019-20 | ₹31.00 | 10 | सफल |
| 2020-21 | ₹0.00 | 00 | कोई फंड नहीं |
| 2021-22 | ₹0.00 | 00 | कोई फंड नहीं |
| 2022-23 | ₹110.25 | 35 | सर्वाधिक लाभ |
| 2023-24 | ₹0.00 | 00 | कोई फंड नहीं |
| 2024-25 | ₹0.00 | 00 | कोई फंड नहीं |
| 2025-26 | ₹126.00 | 40 | प्रक्रियाधीन |
| कुल | ₹267.25 | 85 | — |
योजना का लाभ उठाने के लिए आवेदक का महाराष्ट्र का स्थायी निवासी होना चाहिए। चूंकि यह योजना विशेष समुदायों के लिए है, इसलिए अनुसूचित जाति या नवबौद्ध समाज का जाति प्रमाण पत्र आवश्यक है।
आवेदक के पास स्वयं के नाम पर कृषि भूमि होना चाहिए और इसके लिए 7/12 व 8 ए जैसे रिकॉर्ड प्रस्तुत करने होते हैं। योजना के तहत व्यक्तिगत किसान या पंजीकृत बचत समूह आवेदन कर सकते हैं। जानकार बताते हैं कि यदि सरकार हर साल नियमित रूप से फंड जारी करे, तो जिले के सैकड़ों और किसान आधुनिक खेती की मुख्यधारा से जुड़ सकेंगे।