भंडारा की मछलियां अब विदेशों में होगी एक्सपोर्ट! 8400 मीट्रिक टन उत्पादन के साथ ‘ब्लू इकोनॉमी’ में बड़ी छलांग
Bhandara Fish Farming: भंडारा की मछलियां अब विदेशों में मचाएंगी धूम! 17,363 हेक्टेयर जलक्षेत्र और आधुनिक तकनीक से बढ़ रहा मत्स्य उत्पादन। नागपुर के बाजारों में भारी मांग, निर्यात की तैयारी शुरू।
- Written By: प्रिया जैस
फिश मार्केट (सौजन्य-सोशल मीडिया, कंसेप्ट फोटो)
Freshwater Fish Export India: तालाबों और जलाशयों के लिए प्रसिद्ध भंडारा जिले में मत्स्य व्यवसाय तेजी से प्रगति कर रहा है। यहां उत्पादित मीठे पानी की मछलियों की देश-विदेश के बाजारों में मांग लगातार बढ़ रही है, जिससे निर्यात की संभावनाएं भी मजबूत हो रही हैं। वर्ष 2025-26 में जिले में 451 लाख मत्स्य बीज का संचयन किया गया, जबकि फरवरी के अंत तक 8402 मीट्रिक टन मछली उत्पादन दर्ज किया गया है।
मछुआरों की आय में वृद्धि
स्थानीय जलस्रोतों नदियों, तालाबों और खेत तालाबों का प्रभावी उपयोग कर बड़े पैमाने पर मत्स्य उत्पादन किया जा रहा है, जिससे मछुआरों की आय में वृद्धि हो रही है। जिले के लगभग 17,363 हेक्टेयर जलक्षेत्र में मत्स्य उत्पादन हो रहा है, जिसका लाभ 138 मत्स्य सहकारी संस्थाओं के करीब 11,500 सदस्यों को मिल रहा है।
मत्स्य विभाग की ओर से तेज़ी से बढ़ने वाली प्रजातियों के संवर्धन पर विशेष जोर दिया जा रहा है, जिससे उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में सुधार हुआ है।भंडारा जिले ने मत्स्य बीज उत्पादन में भी उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। 19 सहकारी संस्थाओं ने 1350.5 लाख मत्स्य बीज का उत्पादन किया, जबकि शिवनीबांध स्थित शासकीय केंद्र में 375.5 लाख बीज तैयार किए गए। वर्ष 2023-24 में कुल 2729 लाख मत्स्य बीज उत्पादन दर्ज हुआ।
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मत्स्य बीज उत्पादन
1350.5 लाख – सहकारी संस्थाएं (19)
375.5 लाख – शासकीय केंद्र (शिवनीबांध)
2729 लाख – कुल उत्पादन (2023-24)
17,363 – हेक्टेयर जलक्षेत्र
138 – मत्स्य सहकारी संस्थाएं
11,500 – लाभार्थी सदस्य
सरकार से मिल रहा अनुदान
वर्ष 2024-25 में भारी बारिश और बाढ़ के कारण मत्स्य बीज बह जाने से उत्पादकों को नुकसान हुआ था। इसके लिए 2025-26 में 39.58 लाख रुपये की सहायता राशि वितरित की गई, जिससे मछुआरों को राहत मिली। 15 मत्स्य सहकारी संस्थाओं के 364 सदस्यों को 6335 किलो जाल और 54 नाव खरीदने की स्वीकृति दी गई है। इसके लिए करीब 37 लाख रुपये का अनुदान दिया जा रहा है, जिससे उत्पादन क्षमता में और वृद्धि होगी।
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निर्यात के लिए बढ़ते कदम
विशेषज्ञों के अनुसार, गिफ्ट तिलापिया जैसी उन्नत प्रजातियों के उत्पादन को बढ़ावा देकर अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी भंडारा अपनी पहचान बना सकता है। बेहतर गुणवत्ता और बढ़ते उत्पादन के कारण जिले की मछलियां निर्यात के लिए तैयार मानी जा रही हैं। धरती आबा जनजातीय उत्कर्ष अभियान’ के तहत 2026-27 से 2028-29 तक 90 प्रतिशत अनुदान वाली योजनाएं लागू की जाएंगी। इसमें बायोफ्लॉक, आरएएस, पिंजरा मत्स्यपालन और नाव निर्माण जैसे प्रकल्प शामिल हैं।
नागपुर बाजार में बढ़ी मांग
जिले में उत्पादित बड़ी मछलियों की बिक्री नजदीकी नागपुर बाजारों में की जा रही है, जहां इसकी मांग लगातार बढ़ रही है। कुल मिलाकर, जल संसाधनों के बेहतर उपयोग, सरकारी योजनाओं और आधुनिक तकनीकों के चलते भंडारा जिले में मत्स्य व्यवसाय न केवल आत्मनिर्भर बन रहा है, बल्कि अब निर्यात की दिशा में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है।
