वैनगंगा पर मौत का सफर! आजादी के 78 साल बाद भी 2 जिले के बीच पुल का सपना अधूरा, टूट रहे शादियों के रिश्ते
Bhandara River News: भंडारा के इटान, चंद्रपुर के कोलारी के बीच वैनगंगा पर पुल न होने से ग्रामीण जान जोखिम में डालकर नाव से सफर कर रहे हैं,बुनियादी सुविधाओं के अभाव में युवाओं के रिश्ते भी टूट रहे हैं।
- Written By: रूपम सिंह
Bhandara Chandrapur road issue (सोर्सः सोशल मीडिया)
Wainganga River Bridge News: देश जहां एक तरफ आजादी के अमृत महोत्सव का जश्न मना रहा है और डिजिटल इंडिया के नारों से आसमान गूंज रहा है, वहीं भंडारा और चंद्रपुर जिले की सीमा पर रहने वाले ग्रामीणों के लिए हकीकत किसी डरावने सपने जैसी है। भंडारा जिले के इटान गांव और चंद्रपुर के कोलारी गांव के बीच आज भी सड़क संपर्क का नामोनिशान नहीं है। वैनगंगा नदी का विशाल और खतरनाक पाट इन दोनों गांवों को अलग करता है, जिसे पार करने के लिए ग्रामीणों के पास जर्जर नाव के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है।
यह विडंबना ही है कि यह इलाका राज्य के दो कद्दावर राजनेताओं के कार्यक्षेत्र में आता है। इटान गांव कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और विधायक नाना पटोले के साकोली विधानसभा क्षेत्र का आखिरी छोर है, तो दूसरी तरफ कोलारी गांव भाजपा विधायक बंटी भांगडिया के चिमूर विधानसभा क्षेत्र का हिस्सा है।
एक तरफ विपक्ष का मजबूत चेहरा और दूसरी तरफ सत्तापक्ष का प्रभावशाली विधायक होने के बावजूद, वैनगंगा पर एक पुल का निर्माण न हो पाना कई अनसुलझे सवाल खड़े कर रहा है। स्थानीय नागरिक अब दबी जुबान में नहीं, बल्कि खुलकर पूछ रहे हैं कि आखिर उनके हिस्से का विकास इन लहरों में कब तक डूबता रहेगा। पुल न होने का असर केवल यात्रा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने इलाके के सामाजिक ताने-बाने को भी छिन्न-भिन्न कर दिया है। बारिश के दिनों में जब वैनगंगा उफान पर होती है, तो दोनों गांवों का संपर्क दुनिया से पूरी तरह कट जाता है।
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आपातकालीन स्थिति में किसी मरीज या गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाना जान हथेली पर रखने जैसा होता है। ग्रामीण बताते हैं कि आवागमन की इन दुश्वारियों के कारण अब इस इलाके में युवाओं के रिश्ते तक नहीं हो पा रहे। सड़क और पुल की कमी की वजह से कई शादियां टूट चुकी हैं, क्योंकि कोई भी अपनी बेटी को ऐसे गांव में नहीं भेजना चाहता जहां पहुंचने का रास्ता मौत के सफर से होकर गुजरता हो।
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शेष निधि के अभाव में काम अधूरा
विधायक नाना पटोले ने बताय की जब मैं सांसद था, तब केंद्र सरकार ने इस पुल के निर्माण के लिए 100 करोड़ रुपये स्वीकृत किए थे, लेकिन बाद में शेष निधि रोक दी गई, जिससे काम अधूरा रह गया। आज भी लोगों को जान जोखिम में डालकर सफर करना पड़ रहा है।
सरकार नहीं दे रही ध्यान
ग्रामीण इटान संदीप मोटघरे ने बताय की अगर पुल बन जाता है तो भंडारा और चंद्रपुर के सीमावर्ती क्षेत्रों के किसानों, विद्यार्थियों और व्यापारियों को बड़ा लाभ होगा। शिक्षा और व्यापार के लिए यह मार्ग अत्यंत उपयोगी साबित होगा, लेकिन सरकार इस ओर ध्यान नहीं दे रही है।
नाव से पार करना कठिन
कोलारी ग्रामीण नेपाल हुमने ने बताय की पुल नहीं होने से बरसात में जान सांसत में रहती है। वैनगंगा की नाव से पार करना मौत को बुलावा देने जैसा है। सड़क नहीं होने से रिश्तेदार आने से कतराते हैं, जिससे कई शादियां नहीं हो पाई।
