भंडारा में भीषण गर्मी में बढ़ा रक्त संकट, जिला अस्पताल में बचा मात्र 167 यूनिट स्टॉक, रक्तदान की अपील तेज
भंडारा जिला अस्पताल में गर्मी के कारण रक्तदान शिविरों में कमी आई है, जिससे ब्लड स्टॉक गिरकर 167 यूनिट रह गया है। सिकलसेल व थैलेसीमिया मरीजों के लिए रक्त जुटाना बड़ी चुनौती।
Bhandara Blood Bank District General Hospital News: सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था में रक्त की उपलब्धता सीधे मरीजों के जीवन से जुड़ी होती है। भंडारा जिला सामान्य अस्पताल का सरकारी ब्लड बैंक साल भर रक्त संग्रह में अग्रणी रहता है, लेकिन वर्तमान में भीषण गर्मी के कारण रक्तदान शिविरों की संख्या में भारी गिरावट आई है।
स्थिति यह है कि अन्य मौसम की तुलना में गर्मियों में हर महीने औसतन 200 से 300 यूनिट रक्त का संग्रह कम हो रहा है, जिससे वर्तमान स्टॉक घटकर मात्र 167 यूनिट रह गया है। गर्मियों के दौरान सड़क दुर्घटनाओं की संख्या बढ़ जाती है।
साथ ही सिकलसेल, थैलेसीमिया, एनीमिया और प्रसव जैसे मामलों के लिए रक्त की मांग लगातार बनी रहती है। दूसरी ओर, स्कूलों और कॉलेजों में ग्रीष्मकालीन अवकाश और अत्यधिक तापमान के कारण सामाजिक कार्यक्रमों में कमी आई है, जिससे रक्तदान शिविरों का आयोजन प्रभावित हुआ है।
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वर्तमान में उपलब्ध 167 यूनिट के स्टॉक को देखते हुए प्रशासन अब व्यक्तिगत और सामाजिक स्तर पर रक्त संग्रह बढ़ाने के विशेष प्रयास कर रहा है। जिले में सिकलसेल के मरीज अधिक हैं। भंडारा जिला सिकलसेल प्रभावित क्षेत्र होने के कारण इस ब्लड बैंक पर बड़ी जिम्मेदारी है।
केंद्र में वर्तमान में 276 थैलेसीमिया और 1,047 सिकलसेल सहित कुल 1,323 मरीज पंजीकृत हैं। इन मरीजों को पिछले एक वर्ष में 1,341 यूनिट रक्त मुफ्त वितरित किया गया है। मरीजों की सुविधा के लिए यहां डे केयर यूनिट की व्यवस्था है, जिससे उन्हें रक्त के लिए भटकना नहीं पड़ता।
आधुनिक तकनीक और गोल्डन डोनर्स का साथ रक्त की शुद्धता जांचने के लिए ईयूएसए तकनीक और पारदर्शिता के लिए ईरक्तकोष प्रणाली का उपयोग किया जा रहा है। जिले में दुर्लभ नेगेटिव ब्लड ग्रुप वाले 533 गोल्डन डोनर्स पंजीकृत हैं।
वहीं, आपात स्थिति में तुरंत पहुंचने वाले 332 लाइव डोनर्स भी प्रशासन के संपर्क में हैं। संकट के समय इन्हीं दाताओं के सहयोग से जरूरतमंदों को जीवनदान मिल रहा है। यहां रक्त घटक पृथक्करण कंपोनेंट सेपरेशन की सुविधा भी उपलब्ध है, जिससे लाल रक्त कोशिकाएं, प्लाज्मा और प्लेटलेट्स अलग किए जा सकते हैं।
गर्मी के संकट से निपटने के लिए सोशल मीडिया और स्वयंसेवी संस्थाओं के माध्यम से जागरूकता लाई जा रही है। अतिजोखिम वाले मरीजों और आपातकालीन सर्जरी के लिए रक्त आरक्षित रखा जा रहा है ताकि किसी का ऑपरेशन न रोकना पड़े।
गंभीर स्थिति पैदा न हो जिला सामान्य अस्पताल के साथ ग्रामीण और उपजिला अस्पतालों को रक्त की आपूर्ति के लिए स्वतंत्र इकाइयां कार्यरत हैं। हालांकि इस समय कमी महसूस हो रही है, लेकिन हम सतर्क हैं कि रक्त के अभाव में कोई गंभीर स्थिति पैदा न हो।
डॉ. संदीप गजभिये, जिला शल्य चिकित्सक, भंडारा। जनसहयोग जरूरी गर्मियों में रक्त की कमी एक सामान्य समस्या है, लेकिन हम किसी भी मरीज की जान खतरे में नहीं आने देंगे। युवाओं को अपने विशेष अवसरों पर रक्तदान करना चाहिए। सामाजिक संस्थाओं को भी आगे आकर सहयोग करना चाहिए। डॉ. विजय कुनघाडकर, रक्त संक्रमण अधिकारी
जिला सरकारी ब्लड बैंक के आंकड़े आपात स्थिति के लिए लाइव डोनर्स 332 पिछले वर्ष आयोजित कुल रक्तदान शिविर से प्राप्त 192 यूनिट वर्तमान में उपलब्ध ब्लड बैग्स का स्टॉक 167 यूनिट रक्त की शेल्फ लाइफ अधिकतम 35 दिन गर्मियों में मासिक औसत कमी 200 से 300 यूनिट।
