अतिक्रमण हटाने के लिए तोडू दस्ता ही नहीं, भंडारा में एक कर्मचारी के भरोसे चल रहा काम
Bhandara News: भंडारा शहर में अतिक्रमण तेजी से बढ़ रहा है। तोड़ू दस्ते की कमी से अतिक्रमण हटाना मुश्किल नगर परिषद प्रशासन के लिए चुनौती साबित हो रहा है।
- Written By: आकाश मसने
अतिक्रमण हटाते जिला प्रशासन की टीम (फोटो नवभारत)
Bhandara Encroachment News: भंडारा शहर में बढ़ते अतिक्रमण की समस्या से नागरिक और प्रशासन दोनों ही त्रस्त हैं। शहर को सुंदर और स्वस्थ बनाए रखना है तो नगर परिषद को तोडू दस्ते का गठन करना ही चाहिए। क्योंकि किसी भी शहर की सड़कें, बाजार और महत्वपूर्ण स्थानों पर अतिक्रमण होता ही है। यह अतिक्रमण हटाने की एकमात्र जिम्मेदारी इस दस्ते पर होती है।
भंडारा शहर में बेहिसाब अतिक्रमण है लेकिन अतिक्रमण हटाने के लिए तोडू दस्ता ही नहीं है। अगर कभी अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की जाती है तो एक-दो दिन में समाप्त हो जाती है। जाहिर है कि प्रशासन शहर का पूरा अतिक्रमण हटा ही नहीं पाता और जो अतिक्रमण हटाया जाता है वह दूसरे ही दिन पहले की तरह बहाल हो जाता है।
सफाई विभाग से कर्मियों की लेते हैं मदद
नगर पालिका के पास अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाने के लिए स्वतंत्र टीम नहीं है। ऐसे में हर बार सफाई विभाग से कर्मचारी लाकर कार्रवाई करनी पड़ती है। सफाई कर्मचारी पहले से ही शहर की स्वच्छता व्यवस्था संभालने में व्यस्त रहते हैं। जब इन्हें अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई में लगाया जाता है, तो सफाई व्यवस्था निश्चित रूप से कुछ न कुछ प्रभावित हो जाती है।
सम्बंधित ख़बरें
अभिनेत्री उषा चव्हाण के जमीन विवाद में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की बड़ी एंट्री, TDR ट्रांजैक्शन पर लगाई रोक
नवी मुंबई में गुलाबी बहार! नेरुल के वेटलैंड्स पर उतरा हजारों फ्लेमिंगो का झुंड; देखें प्रकृति का यह नजारा
लाडकी बहीन योजना में अपात्र घोषित 70 लाख महिलाओं को मिला आखिरी मौका; दोबारा जमा कर सकेंगी दस्तावेज
संगठन सृजन अभियान के तहत कांग्रेस का बड़ा कदम, मुंबई में 7 हजार पदाधिकारी सीखेंगे राजनीति के गुर
इससे नागरिकों को दोहरी परेशानी उठानी पड़ती है, न तो अतिक्रमण हट पाता है और न ही समय पर सफाई होती है।तोडू दस्ता न होने के कारण जब भी कार्रवाई की जाती है, नगर परिषद के लगभग सभी विभागीय अधिकारियों को उपस्थित रहना होता है।
अन्य विभागों का कामकाज होता है प्रभावित
इंजीनियरिंग, जल विभाग, कर विभाग, बिजली विभाग और प्रशासनिक शाखा के अधिकारी भी मौके पर बुलाए जाते हैं। इससे उनके नियमित कामकाज पर विपरीत असर होता है।कई बार तो जरूरी फाइलें और विकास संबंधी कार्य अटक जाते हैं, क्योंकि अधिकारी अतिक्रमण हटाने के लिए मैदान में डटे रहते हैं।
भंडारा शहर के बाजार परिसर, मुख्य सड़कों और बस स्टैंड परिसर में अतिक्रमण लंबे समय से बढ़ता जा रहा है। अनेक बार शिकायतें मिलने के बाद भी जब तोडू दस्ते की कमी सामने आती है, तब प्रशासन को कार्रवाई स्थगित करनी पड़ती है। इससे अतिक्रमणकारियों का मनोबल और बढ़ जाता है। वे जानते हैं कि नगर पालिका के पास स्थायी दस्ता नहीं है, इसलिए सख्त कार्रवाई की संभावना कम है।
नागरिकों में नाराजगी
शहर के नागरिकों का कहना है कि नगर पालिका हर बार केवल नोटिस देने और अस्थायी कार्रवाई करने, टीन टप्पर हटाने तक ही सीमित रहती है। बिना स्थायी दस्ते के अतिक्रमण हटाना मुश्किल है। भंडारा नगर परिषद के पास अतिक्रमण तोडू दस्ते के नाम पर एक क्लर्क भर उपलब्ध है। उस पर भी अन्य कई कामों का बोझ है।
यह भी पढ़ें:- OBC की लड़ाई से दूरी महंगी पड़ेगी…विजय वडेट्टीवार ने दी चेतावनी, महाराष्ट्र में आएगा सियासी तूफान
सड़क किनारे अवैध रूप से लगाए गए ठेले, दुकानें और निर्माण के कारण नागरिकों को पैदल चलने तक की जगह नहीं बचती। यातायात अव्यवस्थित होता है और दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ता है।
अतिक्रमण तोडू दस्ता न होने से प्रशासन, अधिकारी और नागरिक सभी परेशान हैं। सफाई विभाग पर अतिरिक्त बोझ, अधिकारियों की व्यस्तता और अधूरी कार्रवाई ने समस्या को और गहरा कर दिया है।
यह अधिकारी भी दस्ते में शामिल
- तोडू दस्ते में नगर परिषद के अधिकारी और सफाई कर्मचारियों के अलावा पुलिसकर्मी कानून व्यवस्था बनाए रखने और बल प्रयोग करने के लिए
- राजस्व अधिकारी या तहसीलदार: भूमि विवादों और अतिक्रमण की पुष्टि करने और हटाने के आदेश देने के लिए।
- अन्य सरकारी कर्मचारी: विभिन्न विभागों जैसे नगर परिषद, सार्वजनिक निर्माण विभाग आदि के कर्मचारी शामिल होते हैं।
