वनवासी नहीं, आदिवासी हैं… भंडारा में गृहमंत्री शाह के बयान के खिलाफ हुआ आंदोलन, की अधिकारों की मांग
Bhandara Tribal Protest: भंडारा में संयुक्त आदिवासी कृति समिति के नेतृत्व में विशाल धरना-प्रदर्शन हुआ। प्रदर्शनकारियों ने आदिवासियों को वनवासी कहे जाने का विरोध करते हुए मांगों का ज्ञापन सौंपा।
- Written By: केतकी मोडक
भंडारा में आंदोलन करते आदिवासी (सोर्स- फोटो नवभारत)
Amit Shah Statement Protest In Bhandara: संयुक्त आदिवासी कृति समिति, भंडारा के नेतृत्व में जिला कलेक्टर कार्यालय के समक्ष एक दिवसीय विशाल धरना-प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोगों ने भाग लेते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा आदिवासियों को वनवासी कहे जाने पर कड़ा विरोध और नाराजगी व्यक्त की। प्रदर्शनकारियों ने वनवासी नहीं, आदिवासी हैं, हम इस देश के मूलनिवासी हैं जैसे नारों के साथ अपना विरोध दर्ज कराया।
वनवासी कहना समाज का अपमान
आंदोलनकारियों ने कहा कि आदिवासी समाज की पहचान और संवैधानिक अधिकारों का सम्मान किया जाना चाहिए तथा उन्हें वनवासी कहकर संबोधित करना समाज की अस्मिता का अपमान है। इस दौरान समिति ने प्रशासन के माध्यम से केंद्र और राज्य सरकार को सात सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा।
प्रमुख मांगों में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान पर सार्वजनिक आपत्ति दर्ज करने, आदिवासियों की धार्मिक डीलिस्टिंग पर स्थायी रोक लगाने, कोष्टी और माना जातियों को अनुसूचित जनजाति वर्ग में शामिल नहीं करने, लंबित वनाधिकार दावों का शीघ्र निपटारा कर वन पट्टे वितरित करने, गैर-आदिवासियों के कब्जे वाली आदिवासी भूमि वापस दिलाने, जिले में एकलव्य आदिवासी विद्यालय शुरू करने तथा सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार आरक्षित पदों पर वास्तविक आदिवासी युवाओं की भर्ती सुनिश्चित करने की मांग शामिल रही।
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यदि मांगें नहीं मानीं तो भविष्य में और आंदोलन तेज होगा
आंदोलन में विभिन्न आदिवासी सामाजिक संगठनों, कर्मचारी संगठनों, महिला एवं छात्र संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। आयोजकों ने कहा कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो भविष्य में आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
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धरने में अजाबराव चिचामे, गोवर्धन कुंभरे, प्रो। डॉ। प्रमोद वरकड़े, धर्मराज भलावी, अशोक उइके, प्रभा पेंदाम, राजकुमार परतेती, मुकेश धुर्वे, राजेश मरसकोल्हे सहित संयुक्त आदिवासी कृती समिति एवं विभिन्न सहयोगी संगठनों के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में समाजबंध उपस्थित थे।
