भंडारा में घरों तक पहुंच रहे सांप, वन विभाग ने 1926 पर सूचना देने की सलाह दी
Bhandara Forest News: भंडारा जिले में बारिश के कारण सर्पदंश की घटनाओं का खतरा बढ़ गया है। वन विभाग ने नागरिकों से सांप को पकड़ने या मारने का प्रयास न करने और तुरंत हेलो फॉरेस्ट नंबर 1926 पर सूचना दे।
- Written By: केतकी मोडक
सांप की तस्वीर (सोर्स- फोटो नवभारत)
Bhandara Snake Bite Risk: भंडारा जिले में बारिश का मौसम शुरू होते ही सर्पदंश की घटनाओं का खतरा काफी बढ़ गया है। लगातार हो रही बारिश के कारण सांपों के बिलों में पानी भर जाता है, जिससे वे सुरक्षित स्थान की तलाश में बस्तियों, घरों और रिहायशी कॉलोनियों की ओर निकल आते हैं। ऐसी स्थिति में, अनजाने में इंसानों के संपर्क में आने से सर्पदंश की घटनाएं होने की आशंका बढ़ जाती है। अब केवल खेतों और जंगलों में ही नहीं, बल्कि शहरी और ग्रामीण रिहायशी क्षेत्रों में भी सांप अक्सर दिखाई देने लगे हैं।
इसे देखते हुए वन विभाग ने नागरिकों से विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। विभाग का कहना है कि घर या आसपास कहीं भी सांप दिखाई देने पर उसे खुद पकड़ने या मारने का प्रयास कतई न करें। ऐसी स्थिति में तुरंत ‘हैलो फॉरेस्ट’ के टोल फ्री क्रमांक 1926 पर सूचना दें, ताकि वन विभाग का प्रशिक्षित रेस्क्यू दल मौके पर पहुंचकर सुरक्षित तरीके से सांप का रेस्क्यू कर सके।
साफ-सफाई पर ध्यान दें
वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे विशेषकर बच्चों पर कड़ी नजर रखें। इसके साथ ही घर के आसपास पूरी साफ-सफाई बनाए रखने, झाड़ियों और जमा कचरे को तुरंत हटाने तथा रात के समय बाहर निकलते वक्त अनिवार्य रूप से टॉर्च का उपयोग करने की सलाह भी दी गई है। विभाग का मानना है कि थोड़ी सी सतर्कता बरतकर सर्पदंश जैसी गंभीर घटनाओं से काफी हद तक बचा जा सकता है।
सम्बंधित ख़बरें
पुणे PMC की बैठक में राम मंदिर कथित चोरी मुद्दे पर हंगामा, कांग्रेस का स्थगन प्रस्ताव बहुमत से खारिज
मुस्कान ही आधी दवा है! सर्वे में खुलासा- मरीजों की रिकवरी में वरदान साबित होता है डॉक्टरों का अच्छा बर्ताव
अकोला में बरसात में डायरिया से बचाव पर जोर, 16 जून से 31 जुलाई तक चलेगा अभियान
मानसून के लिए PMRDA की आपदा टीम मुस्तैद, बाढ़-भूस्खलन से निपटने को 60 जवान तैनात
टोल फ्री 1926 से तुरंत कार्रवाई: मेंढे
सहायक वन संरक्षक (साकोली) संजय मेंढे ने कहा है कि “कुछ सांप वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत शेड्यूल (अनुसूची) श्रेणी में आते हैं। इसके अलावा, सांप हमारी खाद्य श्रृंखला (फूड चेन) का एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इसलिए सांप को मारे बिना नजदीकी वन विभाग या ‘हैलो फॉरेस्ट’ के टोल फ्री क्रमांक 1926 पर संपर्क करें।”
उन्होंने बताया कि संपर्क करते ही वन विभाग द्वारा घटनास्थल पर तुरंत टीम भेजी जाती है और शिकायतकर्ता के मोबाइल नंबर पर एक शिकायत क्रमांक (कंप्लेंट नंबर) भी भेजा जाता है। उप वन संरक्षक संजय मेंढे ने यह भी स्पष्ट किया कि बरसात के दिनों में रेस्क्यू कॉल की संख्या अत्यधिक होने पर स्थानीय सर्पमित्रों (स्नेक कैचर्स) की भी मदद ली जाती है।
यह भी पढ़ें:- आखिरकार बुआई को मिली गति, यवतमाल में मानसून की वापसी से किसानों को राहत
एंटी-वेनम की उपलब्धता जरूरी: कारेमोरे
सर्प विशेषज्ञ (भंडारा) प्रवीण कारेमोरे ने कहा है कि “हाल ही में क्षेत्र से रसेल वाइपर प्रजाति का एक अत्यधिक जहरीला सांप मिला था, जिसे सुरक्षित रूप से रेस्क्यू कर प्राकृतिक आवास में छोड़ा गया है। वैसे, विषैले सांपों में सबसे अधिक रेस्क्यू कोबरा (नाग) के किए जाते हैं, जिसके बाद करैत (Banded Krait) और फिर रसेल वाइपर का नंबर आता है।”
प्रवीण कारेमोरे ने आगे बताया कि शासकीय मेडिकल कॉलेज भंडारा और क्षेत्र के लगभग सभी प्रमुख चिकित्सा केंद्रों पर सर्पदंश के इलाज के लिए एंटी-वेनम दवाइयां पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। उन्होंने सभी स्थानीय सर्पमित्रों से भी अपील की है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और सिविल अस्पतालों में एंटी-वेनम दवाइयों की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित कराने पर विशेष जोर दें।
