36 हजार किसानों ने बनाई अपने जमीन की कुंडली, 96.76 प्रतिशत मिट्टी में नाइट्रोजन की कमी
भंडारा जिले के 36,946 किसानों ने मिट्टी परीक्षण में भाग लिया। रिपोर्ट में नाइट्रोजन की कमी और खाद के खर्च में कटौती के तथ्य सामने आए हैं।
Bhandara News: खेती अब केवल अनुभव का नहीं, बल्कि विज्ञान का विषय बन गई है. जलवायु परिवर्तन के इस दौर में भंडारा जिले के किसानों ने वैज्ञानिक पद्धति को अपनाते हुए मिट्टी परीक्षण मुहिम में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया है. कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस वित्तीय वर्ष में जिले के 36,946 किसानों ने अपनी भूमि की जांच पूरी कर ली है.
इस पहल से न केवल जमीन की उपजाऊ शक्ति संरक्षित हो रही है, बल्कि खाद के अनावश्यक खर्च में भी बड़ी कटौती देखी जा रही है. भंडारा जिला मृदा सर्वेक्षण प्रयोगशाला की रिपोर्ट ने चौंकाने वाले तथ्य सामने रखे हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, जिले की 96.76 जमीन में नाइट्रोजन नत्र की भारी कमी पाई गई है. वहीं, 57.17 मिट्टी में जस्त जिंक और 40.74 क्षेत्र में सल्फर की कमी है.
खाद के अनावश्यक खर्च में कटौती
हालांकि, राहत की बात यह है कि 84.55 क्षेत्र में पोटेशियम पलाश भरपूर मात्रा में उपलब्ध है. कृषि विभाग अब इन निष्कर्षों के आधार पर किसानों को सीधे खेतों में जाकर खाद के संतुलित उपयोग का मार्गदर्शन दे रहा है. भंडारा के सिविल लाइन्स स्थित शासकीय मृदा परीक्षण प्रयोगशाला में युद्धस्तर पर काम चल रहा है.
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लोकसेवा अधिकार अधिनियम के तहत, मिट्टी के सामान्य नमूनों की रिपोर्ट 30 दिनों के भीतर और पानी के नमूनों की जांच 15 दिनों में पूरी की जा रही है. अब सॉइल हेल्थ कार्ड पोर्टल पर भी यह डेटा उपलब्ध है, जिससे किसान कहीं भी अपनी जमीन की रिपोर्ट देख सकते हैं. कृषि विभाग ने इस वर्ष जिले के 875 गांवों के लिए 37,000 मिट्टी के नमूनों का लक्ष्य रखा था.
- विभाग ने अपनी मुस्तैदी दिखाते हुए 36,946 नमूनों की जांच पूरी कर लगभग 100 लक्ष्य हासिल कर लिया है.
- एक नजर में भंडारा जिले की कृषि विवरण आकड़ेवारी
- कुल भौगोलिक क्षेत्र 4,08,700 हेक्टेयर
- खेती योग्य क्षेत्र 2,19,147 हेक्टेयर
- कुल किसान खातेदार 2,38,794
- सिंचित क्षेत्र 1,64,313 हेक्टेयर
- औसत वर्षा 1,298.50 मि.मी.
- जमीन के पोषक तत्वों की स्थिति प्रतिशत में
- नाइट्रोजन नत्र 96.76 क्षेत्र में कमी
- फास्फोरस स्फुरद 62.13 क्षेत्र में मध्यम
- पोटेशियम पालाश 84.55 क्षेत्र में अधिकता
- जिंक जस्त 57.17 क्षेत्र में कमी
- सल्फर 40.74 क्षेत्र में कमी
मुनाफे में हो रही वृद्धि
जिला मृदा सर्वेक्षण एवं मृदा परीक्षण अधिकारी वृषाली देशमुख ने कहा कि मिट्टी परीक्षण केवल एक प्रक्रिया नहीं, बल्कि टिकाऊ खेती का आधार है. स्वास्थ्य कार्ड की सिफारिशों के अनुसार खाद देने से जमीन की उर्वरता बनी रहती है और रासायनिक खादों पर होने वाला फिजूल खर्च बचता है. इससे किसानों के मुनाफे में निश्चित रूप से वृद्धि हो रही है.
