बीड में ‘फर्जी दिव्यांग’ शिक्षकों पर गिरी गाज: 8 सस्पेंड, 27 अभी भी रडार पर; अली यावर जंग संस्थान ने खोला राज
Beed Zilla Parishad Teachers Suspended: बीड जिला परिषद के 8 शिक्षक निलंबित! फर्जी श्रवण बाधित प्रमाणपत्र के जरिए सरकारी लाभ लेने का भंडाफोड़। सीईओ जिथिन रहमान की बड़ी कार्रवाई, 27 अन्य शिक्षक रडार पर।
- Written By: प्रिया जैस
बीड में शिक्षक निलंबित (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Fake Disability Certificate Scam Maharashtra: महाराष्ट्र के बीड जिले में अधिकारियों ने जिला परिषद द्वारा संचालित विभिन्न प्राथमिक विद्यालयों के आठ शिक्षकों को कथित तौर पर श्रवण बाधित होने का झूठा दावा कर सरकारी रियायतें प्राप्त करने के आरोप में निलंबित कर दिया। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
ये शिक्षक जिले के अलग-अलग हिस्सों में स्थित स्कूलों से जुड़े हैं और उनके खिलाफ जांच के बाद कार्रवाई की गई। यह कार्रवाई अली यावर जंग राष्ट्रीय वाक् एवं श्रवण दिव्यांगजन संस्थान द्वारा किए गए विस्तृत चिकित्सा पुनर्मूल्यांकन के बाद की गई है, जो एक प्रमुख राष्ट्रीय संस्थान है।
निलंबन के दिए आदेश
अधिकारियों ने बताया कि पुनर्मूल्यांकन में पाया गया कि शिक्षकों की श्रवण क्षमता में कमी श्रवण बाधित व्यक्तियों के लिए मिलने वाले लाभों के लिए निर्धारित मानक सीमा से काफी कम था। जांच के निष्कर्षों के आधार पर, बीड जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) जिथिन रहमान ने आठ शिक्षकों को तत्काल निलंबित करने का आदेश दिया और उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू करने का निर्देश दिया।
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अधिकारियों ने बताया कि प्रमाणित दिव्यांगता वाले सरकारी कर्मचारियों को कई रियायतें प्राप्त करने का अधिकार है, जिनमें सीधी भर्ती में आरक्षण, तरजीही तबादले और पदोन्नति, अतिरिक्त यात्रा भत्ता, पेशेवर कर छूट और आयकर रियायतें शामिल हैं। हालांकि, प्रशासन को कुछ शिक्षकों और कर्मचारियों द्वारा प्रस्तुत दिव्यांगता प्रमाण पत्रों और विशिष्ट दिव्यांगता पहचान पत्र (यूडीआईडी) कार्डों की प्रामाणिकता पर सवाल उठाने वाली कई शिकायतें प्राप्त हुई।
कारावास और जुर्माने का प्रावधान
राज्य दिव्यांग कल्याण विभाग के निर्देशों के बाद शिक्षा विभाग ने दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के प्रावधानों के तहत दिव्यांगता प्रमाणपत्रों के सत्यापन की प्रक्रिया शुरू की। अधिनियम की धारा 91 के तहत दिव्यांगजनों के लिए निर्धारित लाभों का धोखाधड़ी से लाभ उठाने पर दो साल तक के कारावास, एक लाख रुपये तक के जुर्माने या दोनों का प्रावधान है।
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शिकायतों के आधार पर संदिग्ध शिक्षकों को पुनः चिकित्सकीय परीक्षण और दिव्यांगता प्रतिशत के पुनर्मूल्यांकन के लिए अली यावर जंग राष्ट्रीय वाक् एवं श्रवण दिव्यांगजन संस्थान भेजा गया। संस्थान की श्रवण मूल्यांकन रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि संबंधित शिक्षक दावा की गई श्रवण दिव्यांगता के निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरते।
इन तहसीलों के शिक्षकों का समावेश
निलंबन आदेशों में कहा गया है कि शिक्षकों ने कथित तौर पर अपनी दिव्यांगता की स्थिति के बारे में गलत जानकारी दी और मानक दिव्यांगता वाले पात्र व्यक्तियों के लिए आरक्षित लाभों का अवैध रूप से लाभ उठाया, जिसके परिणामस्वरूप सरकार को वित्तीय नुकसान हुआ। इनमें से अधिकांश शिक्षक अंबाजोगाई तहसील के विद्यालयों से हैं, जबकि कुछ कैज, बीड और गेओराई तहसीलों से हैं।
सीईओ रहमान ने बताया कि दिव्यांगता लाभ का दावा करने वाले कुल 35 शिक्षकों को चिकित्सा परीक्षण कराने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने कहा, “अब तक आठ शिक्षकों ने प्रक्रिया पूरी कर ली है और उन सभी के दिव्यांगता प्रमाण पत्र अमान्य पाए गए हैं। शेष 27 शिक्षकों को चिकित्सा पुनर्मूल्यांकन कराने के निर्देश दिए गए हैं। चिकित्सा रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।”
(एजेंसी इनपुट के साथ)
