बिना प्रमाणपत्र उठाया दिव्यांग कोटे का लाभ, नांदेड़ में प्रिंसिपल समेत 7 शिक्षक निलंबित

Nanded News: महाराष्ट्र के नांदेड़ में फर्जी दिव्यांगता प्रमाणपत्र के जरिए दिव्यांग कोटे का लाभ लेने के आरोप में एक प्रधानाध्यापक समेत 7 शिक्षकों को निलंबित किया गया। जांच में अनियमितताएं उजागर हुईं।
Nanded Fake Disability Certificates Teachers Suspended
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Nanded Teachers Suspended: महाराष्ट्र सरकार ने फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्रों के इस्तेमाल पर लगाम लगाने के लिए कड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। दिव्यांग कल्याण विभाग के सचिव तुकाराम मुंढे ने इस संबंध में सभी जिला परिषदों को निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत, तबादलों में छूट या मनपसंद जगह पर तबादला पाने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों, शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों के प्रमाण पत्रों की जांच की जाएगी। इसी के तहत नांदेड़ जिले में बड़ी कार्रवाई हई है।

महाराष्ट्र के नांदेड़ जिले में वैध दिव्यांगता प्रमाणपत्र जमा किए बिना दिव्यांग कोटे का लाभ उठाने के आरोप में एक प्रधानाध्यापक समेत 7 स्कूली शिक्षकों को निलंबित कर दिया गया है। अधिकारियों के अनुसार प्राथमिक शिक्षा विभाग ने पिछले वर्ष सितंबर में फर्जी दिव्यांगता दस्तावेजों का इस्तेमाल करने वाले शिक्षकों की पहचान के लिए एक सत्यापन अभियान शुरू किया था।

जांच में सामने आया सच

जांच में पाया गया कि 7 शिक्षकों के दिव्यांगता प्रमाणपत्र जिला सिविल सर्जन कार्यालय द्वारा प्रबंधित निर्गमन रजिस्टर में दर्ज ही नहीं थे। निष्कर्षों से यह भी सामने आया कि इन मामलों में दिव्यांगता का प्रतिशत 40 प्रतिशत से कम था, जिससे वे इस श्रेणी के तहत मिलने वाले लाभों के लिए पात्र नहीं थे। एक मामले में जिला परिषद के एक स्कूल के प्रधानाध्यापक को बिना कोई संबंधित प्रमाणपत्र जमा किए ही दिव्यांगता रियायतें दिए जाने का आरोप है।

फर्जी प्रमाणपत्र पर सजा का प्रावधान

दिव्यांग व्यक्ति अधिकार अधिनियम 2016 की धारा 11 के अनुसार, फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र जारी करने वाले को दो साल तक की कैद या एक लाख रुपये तक का जुर्माना, या दोनों की सजा हो सकती है। यदि जिला परिषद में कार्यरत किसी अधिकारी, कर्मचारी या शिक्षक का प्रमाण पत्र गलत या जाली पाया जाता है, तो उसे कोई भी लाभ नहीं दिया जाएगा। इसके अलावा, पहले से मिले लाभों को भी रद्द कर दिया जाएगा और उन पर उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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