कृषि में नई दिशा: छत्रपति संभाजीनगर में कार्बन खेती पर चर्चा, कृषि विवि में विशेषज्ञों की कार्यशाला
Sambhajinagar Carbon Farming: संभाजीनगर के वसंतराव नाईक मराठवाड़ा कृषि विश्वविद्यालय में कार्बन क्रेडिट, कार्बन खेती व कार्बन ट्रेडिंग पर कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें विशेषज्ञों ने भाग लिया।
- Written By: अंकिता पटेल
Sambhajinagar Carbon Credit Workshop ( Source: Social Media )
Chhatrapati Sambhajinagar Carbon Credit Workshop: छत्रपति संभाजीनगर वसंतराव नाईक मराठवाड़ा कृषि विश्वविद्यालय में 26 मार्च 2026 को कार्बन क्रेडिट, कार्बन खेती और कार्बन ट्रेडिंग विषय पर कार्यशाला आयोजित की गई।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति डॉ. इन्द्र मणि ने की, प्रमुख अतिथि के रूप में परभणी के विधायक एवं विवि कार्यकारी परिषद सदस्य डॉ. राहुल पाटील, ग्रो इंडिया कंपनी की सीईओ डॉ. उषा बारवाले झेहर व निदेशक अविनाश सोनी थे।
डॉ. विनय सहगल व डॉ. आरती भाटिया व डॉ. प्रमोद झा ने ऑनलाइन माध्यम से भाग लिया। डॉ. खिजर बेग व डॉ. हरिहर कौसडीकर, डॉ. राजेश क्षीरसागर, डॉ. राहुल रामटेके, डॉ. प्रविण वैद्य, डॉ. हिराकांत कालपांडे सहित कई वैज्ञानिक व अधिकारी मौजूद थे। इन्द्र मणि ने बताया कि 1918 में शोध केंद्र के रूप में शुरू हुई संस्था ने 1972 में विश्वविद्यालय का दर्जा प्राप्त किया।
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कुलपति इंद्रमणि व विधायक डॉ. राहुल ने किया मार्गदर्शन
आज भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद से ‘ए’ ग्रेड हासिल कर राज्य के अग्रणी कृषि विश्वविद्यालयों में स्थान बनाया है। उन्होंने बताया कि पिछले साढ़े तीन वर्षों में जलवायु परिवर्तन, मृदा स्वास्थ्य व प्रिसिजन खेती के क्षेत्र में लगभग 150 करोड़ रुपये के शोध प्रोजेक्ट प्राप्त हुए हैं।
जलवायु परिवर्तन के लिहाज से अत्यंत संवेदनशील राज्यों में महाराष्ट्र शामिल है व मराठवाड़ा के किसानों के लिए कार्बन क्रेडिट जोखिम प्रबंधन का एक प्रभावी विकल्प बन सकता है।
अतिवृष्टि से फसलों को हुए नुकसान का उल्लेख करते हुए उन्होंने शाश्वत खेती पद्धतियों की जरुरत पर जोर दिया। विधायक पाटील ने कार्बन खेती को भविष्य की दिशा बताते हुए कहा कि इससे किसानों की आय बढ़ाने के साथ पर्यावरण संरक्षण भी संभव है। उन्होंने मराठवाड़ा में इस अवधारणा के व्यापक प्रसार व सभी संस्थाओं व वैज्ञानिकों की सक्रिय भागीदारी पर जोर दिया।
क्रियान्वयन से जुड़ी सभी समस्याओं पर दी जानकारी
ऑनलाइन संबोधित करते हुए डॉ. सहगल, डॉ. आरती व डॉ. झा ने कार्बन क्रेडिट के विभिन्न मॉडल, चुनौतिया व भारत में इसके क्रियान्वयन से जुड़ी समस्याओं पर प्रकाश डाला।
उन्होंने बताया कि देश में अभी कार्बन क्रेडिट पंजीकरण के लिए पर्याप्त संस्थागत व्यावस्था विकसित नहीं हुई है।
डॉ. उषा ने बताया कि पंजाब सहित देश के कई राज्यों में कार्बन क्रेडिट परियोजनाएं सफलतापूर्वक चलाई जा रही हैं, वर्तमान में लगभग 10 लाख एकड़ क्षेत्रय 2 लाख किसान इससे जुड़े हैं।
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कार्यशाला में विवि व ग्रो इंडिगों के बीच सहयोग बढ़ाने, छात्रओं के लिए शोध प्रोजेक्ट व एमओयू करने पर चर्चा हुई। कृषि अर्थशास्त्र विभाग के डॉ. सचिन मोरे को डेटा संकलन व विश्लेषण की जिम्मेदारी सौंपी गई।
