जमीन रूपांतरण मामले में फंसे पूर्व RDC खिरोलकर; जांच रिपोर्ट मिलते ही कलेक्टर विनय गौडा ने दिए समीक्षा के आदेश
Chhatrapati Sambhajinagar Scam: रिश्वत मामले में गिरफ्तार तत्कालीन आरडीसी विनोद खिरोलकर के कार्यकाल में हुए जमीन रूपांतरणों की दोबारा जांच होगी। कलेक्टर विनय गौडा ने समीक्षा के निर्देश दिए हैं।
- Written By: रूपम सिंह
कलेक्टर विनय गौडा (फोटो सोर्स-सोशल मीडिया)
Chhatrapati Sambhajinagar ACB Arrest Vinod Khirolkar: तत्कालीन निवासी उपजिलाधिकारी विनोद खिरोलकर के कार्यकाल में वर्ग-2 की जमीन को वर्ग-1 में परिवर्तित करने से जुड़े मामलों की फाइलें एक बार फिर जांच के दायरे में आ सकती हैं। जांच समिति द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट के आधार पर जिलाधिकारी विनय गौडा जी.सी. ने संबंधित प्रकरणों की पुनः समीक्षा करने का निर्णय लिया है। प्रशासन अब रिपोर्ट के निष्कर्षों का अध्ययन कर आगे की कार्रवाई तय करेगा।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, यदि जांच रिपोर्ट में जमीन रूपांतरण प्रक्रिया के दौरान किसी प्रकार की अनियमितता, नियमों के उल्लंघन या प्रक्रियागत त्रुटियों का उल्लेख पाया जाता है, तो संबंधित मामलों को दोबारा खोला जा सकता है। ऐसे मामलों में विभागीय आयुक्त की अनुमति प्राप्त करने के बाद सुनवाई की प्रक्रिया शुरू की जाएगी और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
छत्रपति संभाजीनगर निवासी उपजिलाधिकारी जनार्दन विधाते ने बताया कि जांच समिति की रिपोर्ट प्रशासन को प्राप्त हो चुकी है। रिपोर्ट में दर्ज निष्कर्षों और सिफारिशों के आधार पर आगे की कार्रवाई का निर्णय लिया जाएगा। प्रशासन यह सुनिश्चित करेगा कि जमीन रूपांतरण से जुड़े सभी मामलों की निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से जांच हो।
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अनियमितता मिलने पर हो सकती है सुनवाई
गौरतलब है कि वर्ग-2 की जमीन को वर्ग-1 में परिवर्तित करने के लिए कथित रूप से 5 लाख रुपये की रिश्वत लेने के आरोप में तत्कालीन निवासी उपजिलाधिकारी विनोद खिरोलकर और महसूल सहायक दिलीप त्रिभुवन को 3 मई 2025 को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने जाल बिछाकर रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। इस कार्रवाई के बाद जमीन रूपांतरण से जुड़े कई निर्णयों और प्रक्रियाओं पर सवाल उठे थे।
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अब जांच समिति की रिपोर्ट सामने आने के बाद प्रशासन उन सभी मामलों की दोबारा समीक्षा करने की तैयारी में है, जिनमें खिरोलकर के कार्यकाल के दौरान वर्ग-2 जमीन को वर्ग-1 में परिवर्तित किया गया था। यदि जांच में किसी प्रकार की गड़बड़ी या नियमों की अनदेखी सामने आती है, तो संबंधित आदेशों की वैधता की भी जांच की जा सकती है। प्रशासनिक हलकों में इस निर्णय को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे जमीन रूपांतरण से जुड़े पुराने मामलों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। साथ ही, भविष्य में ऐसी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।
