Sambhajinagar Water Scheme: अधूरी मरम्मत के बीच पानी आपूर्ति की जल्दबाजी, 2740 करोड़ की योजना में बड़ी तकनीकी
Sambhajinagar Water Scheme: संभाजीनगर की 2740 करोड़ की जल योजना में तकनीकी खामियां सामने आई हैं। जैकवेल में लीकेज और अधूरी मरम्मत के बावजूद पानी आपूर्ति शुरू करने की तैयारी चिंता बढ़ा रही है।
- Written By: केतकी मोडक
प्रतीकात्मक तस्वीर ( Source: Social Media )
Sambhajinagar Water Scheme At Risk: छत्रपति संभाजीनगर शहर की दीर्घकालीन जलापूर्ति सुनिश्चित करने के लिए बनाई जा रही 2740 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी योजना अब गंभीर तकनीकी खामियों के कारण सवालों के घेरे में आ गई है। जायकवाडी बांध स्थित जैकवेल में पाई गई बड़ी त्रुटियों ने चिंता बढ़ा दी है।
हैरानी की बात यह है कि न्यायालयीन समिति द्वारा दिए गए स्पष्ट निर्देशों के बावजूद मरम्मत कार्य अधूरा है, फिर भी नई पाइपलाइन से पानी आपूर्ति शुरू करने की तैयारी की जा रही है। सूत्रों के अनुसार जैकवेल में लगाए गए सभी गेट्स में रिसाव पाया गया है, जो इस परियोजना की सबसे गंभीर समस्या बनकर सामने आया है।
कुछ गेट्स से बड़े पैमाने पर पानी का बहाव हो रहा है। विशेष रूप से निचले स्तर के गेट्स में बड़े छेद होने की जानकारी सामने आई है। लगभग 27 मीटर गहरे इस जैकवेल में तीन स्तरों पर गेट्स लगाए गए हैं, जिनमें सबसे नीचे वाले गेट्स की स्थिति अत्यंत चिंताजनक बताई जा रही है।
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दरारें पड़ने से पाइपलाइन टूटने का सता रहा डर
विशेषज्ञों के अनुसार यदि गेट्स ठीक से कार्य नहीं करते, तो भविष्य में जैकवेल में जमा गाद निकालना भी चुनौतीपूर्ण हो जाएगा, मड पंप के जरिए गाद निकालते समय तकनीकी बाधाएं आएंगी और रखरखाव की लागत भी बढ़ सकती है। जैकवेल तक पहुंचने वाले एप्रोच ब्रिज पर पाइपलाइन को सहारा देने वाले चेयर बेड् भी निम्न गुणवत्ता के पाए गए हैं। इनमें कई जगह दरारें हैं। समिति के निर्देश के बाद भी केवल उपरा उपरी मरम्मत की गई है। भविष्य में उच्च दबाव के साथ पानी आपूर्ति शुरू होने पर पाइपलाइन के क्षतिग्रस्त होने या गिरने का खतरा बना हुआ है। समिति और प्रशासन की बार-बार चेतावनी के बावजूद ठेकेदार कंपनी द्वारा अपेक्षित गति से काम नहीं किया जा रहा है। अतिरिक्त श्रमिक तैनात करने में भी टालमटोल की जा रही है।
कॉफर्ड डैम हटने के बाद बढ़ेगा जोखिम
करीब ढाई महीने पहले उच्च न्यायालय के निर्देश पर गठित समिति ने निरीक्षण कर कई गंभीर खामियां चिन्हित की थीं और उन्हें तत्काल सुधारने के निर्देश महापालिका, महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण और ठेकेदार कंपनी को दिए थे। इसके बावजूद अब तक केवल आंशिक सुधार हुआ है और लगभग 40 से 50 प्रतिशत खामियां अभी भी जस की तस बनी हुई हैं। वर्तमान में सायफन पद्धति से पानी लिया जा रहा है, लेकिन आगामी छह महीनों में परियोजना पूर्ण क्षमता से चालू करने की योजना है। इसके तहत जैकवेल के चारों ओर बना कॉफर्ड डैम हटाया जाएगा, जिससे पूरी संरचना पानी के भीतर चली जाएगी। ऐसे में गेट्स की मजबूती और कार्यक्षमता बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। यदि मौजूदा खामियां दूर नहीं की गई, तो नियंत्रण और रखरखाव में गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती है।
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जल्दबाजी में निर्णय से बढ़ेगा खतरा
इन सभी गंभीर खामियों के बावजूद प्रशासन द्वारा पानी आपूर्ति शुरू करने की तैयारी किए जाने से विशेषज्ञों ने चिंता जताई है।
उनका मानना है कि अधूरी मरम्मत के साथ परियोजना चालू करना भविष्य में बड़े तकनीकी संकट और आर्थिक नुकसान का कारण बन सकता है।
शहरवासियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण इस योजना में गुणवत्ता, सुरक्षा और दीर्घकालीन टिकाऊपन को प्राथमिकता देना जरूरी है।
अन्यथा यह महत्वाकांक्षी परियोजना अपने उद्देश्य से भटक सकती है और नागरिकों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाएगा।
