Sambhajinagar Contractor Pending Bills( Source: Social Media )
Sambhajinagar Contractor Pending Bills: छत्रपति संभाजीनगर महानगरपालिका की आर्थिक स्थिति पर ठेकेदारों की बढ़ती बकाया राशि का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। विभिन्न विकास कार्यों से जुड़े ठेकेदारों के बिलों का भुगतान लंबित रहने से मनपा पर देनदारी बढ़कर लगभग 237 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है।
लेखा विभाग के अनुसार यदि अन्य बकाया मदों को भी जोड़ लिया जाए तो यह राशि और अधिक हो सकती है। छत्रपति संभाजीनगर महानगरपालिका में वर्ष 2026-27 के लिए बजट को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
आगामी कुछ दिनों में विकास कार्यों का प्रारूप तैयार किया जाएगा। इसके पहले लेखा विभाग द्वारा ठेकेदारों के लंबित बिलों की समीक्षा की जा रही है। मिली जानकारी के अनुसार ठेकेदारों के बकाये की राशि लगभग 237 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है।
बताया गया है कि अभी कई बिल पूरी तरह तैयार नहीं हुए हैं। जो बिल तैयार होकर लेखा विभाग में जमा किए गए हैं, उन्हीं के आधार पर यह आंकड़ा सामने आया है। यदि अन्य विभागों के लंबित बिल भी शामिल किए जाएं तो देनदारी में और वृद्धि हो सकती है।
महानगरपालिका में हर महीने करीब 15 से 20 अधिकारी और कर्मचारी संवानिवृत्त होते है। पिछले 2 से तीन वर्षों में सेवानिवृत्त हुए कई कर्मचारियों को भी उनके बकाया लाभ पूरी तरह नहीं मिल पाए है।
जानकारी के अनुसार सेवानिवृत्त कर्मचारियों के करीब 78 करोड़ रुपये अभी भी बकाया है। इसके अलावा ठेकेदारों की देनदारी, सेवानिवृत्ति भुगतान, भूमि अधिग्रहण और ड्रेनेज परियोजनाओं में हिस्सेदारी जैसी मदी को मिलाकर कुल देनदारी लगभग 450 करोड़ रुपए तक पहुंचने की आशंका व्यक्त की जा रही है।
आय कम और खर्च अधिक होने के कारण महानगरपालिका के लेखा विभाग पर वितीय दबाव लगातार बढ़ रहा है। इस बीच मनपा प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि निधि उपलब्ध होने के बाद वरिष्ठता सूची के अनुसार ठेकेदारों के बिलों का भुगतान किया जाएगा, प्राथमिकता के आधार पर लंबित बिलों का निपटारा करने की योजना बनाई जा रही है।
वहीं, नए मनपा आयुक्त ने महानगरपालिका की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए राजस्व बढ़ाने के उपायों पर काम करने की बात कही है। बताया गया है कि आने वाले दिनों में आय के नए स्रोत विकसित करने तथा वित्तीय अनुशासन लागू करने को लेकर कुछ महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा सकते हैं।
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महानगरपालिका में विकास कार्यों की गति बनाए रखने और ठेकेदारों का विश्वास कायम रखने के लिए बकाया भुगतान की समस्या का समाधान जल्द निकालना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।