AIMIM पार्षद मतीन पटेल की कुर्सी पर संकट! अवैध निर्माण ने बढ़ाई मुश्किलें, जानें मेयर राजुरकर ने क्या कहां?
Illegal Construction Case: छत्रपति संभाजीनगर के महापौर समीर राजुरकर ने पार्षद मतीन पटेल के खिलाफ जांच के आदेश दिए हैं। अवैध निर्माण जैसे सेगीन आरोपों के बीच पार्षद पद रद्द हो सकता है।
- Written By: गोरक्ष पोफली
मतीन पटेल व निदा खान (सोर्स: डिजाइन फोटो)
Corporator Matin Patel Disqualification: टीसीएस मामले की आरोपी निदा खान को आश्रय देने के मामले में फंसे AIMIM पार्षद मतीन पटेल की मुश्किलें अब दोहरी हो गई हैं। एक तरफ जहां उन पर आरोपी की मदद करने के गंभीर आरोप हैं, वहीं अब उनके पार्षद पद पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं। छत्रपति संभाजीनगर के महापौर समीर राजुरकर ने स्पष्ट किया है कि मतीन पटेल के खिलाफ महाराष्ट्र महानगरपालिका कानून के तहत कड़ी कार्रवाई प्रस्तावित की जा रही है।
अवैध निर्माण और पार्षद पद का विवाद
महापौर समीर राजुरकर ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि चुनाव के समय उम्मीदवारों को अपनी संपत्ति और अन्य जानकारियों का पूरा और सटीक विवरण देना अनिवार्य होता है। उन्होंने महाराष्ट्र महानगरपालिका कानून की धारा 10 (1) D का हवाला देते हुए कहा कि यदि कोई पार्षद, उसकी पत्नी या उसके आश्रितों ने नगर रचना अधिनियम 1966 का उल्लंघन कर किसी भी प्रकार का अवैध निर्माण किया है, तो उनका पद रद्द किया जा सकता है।
समीर राजुरकर ने कड़े शब्दों में कहा, जब हम चुनाव के वक्त जानकारी देते हैं, तो वह पूरी होनी चाहिए। कुछ भी छिपाना कानूनन अपराध है। यदि किसी पार्षद का किसी अवैध निर्माण में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष हितसंबंध पाया जाता है, तो कानूनन वह पद पर बने रहने के योग्य नहीं रहता।
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जांच के घेरे में दस्तावेज
महापौर ने आगे जानकारी दी कि प्रशासन अब मतीन पटेल के घर और संपत्तियों से संबंधित सभी दस्तावेजों की बारीकी से जांच कर रहा है। विशेष रूप से यह देखा जा रहा है कि संबंधित निर्माण का नियमितीकरण हुआ है या नहीं। यदि जांच में यह पाया जाता है कि निर्माण अनाधिकृत है और नियमों को ताक पर रखकर किया गया है, तो महानगरपालिका कानून के अंतर्गत उनके पार्षद पद को रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
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निदा खान मामला और राजनीतिक प्रभाव
ज्ञात हो कि मतीन पटेल का नाम तब विवादों में आया जब उन पर टीसीएस मामले की आरोपी निदा खान को शरण देने का आरोप लगा। इसके बाद से ही विपक्षी दलों और स्थानीय नागरिकों द्वारा उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की जा रही थी। अब महापौर द्वारा अवैध निर्माण के मुद्दे पर की गई इस घोषणा ने मतीन पटेल के राजनीतिक भविष्य पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
प्रशासन अब दस्तावेजों को मंगाकर यह सुनिश्चित करने में जुटा है कि चुनावी हलफनामे में दी गई जानकारी और जमीनी हकीकत में क्या अंतर है। महापौर ने साफ कर दिया है कि यदि घर अनाधिकृत पाया गया, तो पार्षद पद रद्द होना निश्चित है।
