Sambhajinagar में मिशन ‘कुपोषण मुक्त बालक’, प्रशासन ने तय की तारीख और रणनीति
Chhatrapati Sambhajinagar में पोषण आहार के कारण होने वाले कुपोषण की समस्या गंभीर होते जा रही है। फिलहाल 651 बच्चे कुपोषण का शिकार हैं। 14 नवंबर तक जिले को कुपोषण मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
- Written By: अपूर्वा नायक
कुपोषण (सौ. सोशल मीडिया )
Chhatrapati Sambhajinagar News In Hindi: जिले में पोषण आहार के अभाव से कुपोषण की समस्या गंभीर होती जा रही है। वर्तमान में, 651 बच्चे कुपोषण की श्रेणी में हैं। इन सभी बच्चों को आगामी 14 नवंबर (बाल दिवस) तक कुपोषण से मुक्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए, जिलाधिकारी दिलीप स्वामी ने पंचसूत्रीय कार्ययोजना जारी करते हुए संबंधित विभागों को कड़े निर्देश दिए है। जिलाधिकारी स्वामी ने निवासी उपजिलाधिकारी जनार्दन विधाते की मौजूदगी में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जिला, उप-विभाग, तहसील और गाँव स्तर के अधिकारियों के बातचीत की।
लक्ष्य-आधारित योजना लागू होगी
उन्होंने कहा कि समयबद्ध और लक्ष्य-आधारित योजना के जरिए जिले के सभी बच्चों को कुपोषण की श्रेणी से बाहर लाना हमारा संकल्प है। इसके लिए सभी विभागों को एकजुट होकर कार्य करना होगा। उन्होंने बताया कि महिला एवं बाल विकास, स्वास्थ्य, ग्राम विकास और राजस्व विभाग ने तालमेल से कार्य कर जिले को कुपोषण मुक्त बनाने का संकल्प लिया है।
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कन्नड़ में सबसे कम कुपोषित बच्चे
जिले के विभिन्न क्षेत्रों में कुपोषणग्रस्त बच्चों को पहचान की गई है। जिले में कुल 651 बच्चे कुपोषण के शिकार हैं। इसके तहत छत्रपति संभाजीनगर में 80, कन्नड़ में 28, फुलंब्री में 61, सिल्लोड़ में 95, सोयगांव में 60, गंगापुर में 100, पैठण में 128, वैजापुर में 38 और खुलताबाद में 61 बच्चे कुपोषित पाए गए हैं।
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आहार व स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देंगे अधिकारी
16 अक्टूबरः हर गांव में कुपोषित बच्चों की पहचान कर संबंधित अधिकारी व कर्मी उन्हें गोद लेंगे और उनके आहार व स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देंगे,
17 अक्टूबरः स्वच्छता दिवस मनाकर बच्चों के माता-पिता को स्वास्थ्य और सफाई के महत्व की जानकारी दी जाएगी।
28 अक्टूबरः गांव के अतिथि बच्चों को पौष्टिक आहार वितरित करेंगे।
3 व 4 नवंबरः प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के जरिए सभी बच्चों की स्वास्थ्य जाँच की जाएगी।
7 नवंबरः माता-पिता के समुपदेशन शिविर आयोजित कर उन्हें पौष्टिक आहार, पोषणयुक्त भोजन, व्यक्तिगत स्वच्छता व बच्चों की देखभाल के बारे में मार्गदर्शन किया जाएगा।
