छत्रपति संभाजीनगर मनपा का फैसला: तीन घंटे की बहस के बाद निजी एजेंसी से संपत्ति सर्वे का प्रस्ताव पास
Private Agency Property Survey: छत्रपति संभाजीनगर मनपा ने निजी एजेंसी से संपत्तियों के 5 वर्षीय सर्वे को मंजूरी दी। मेयर ने पारदर्शी प्रक्रिया और नागरिकों को बिना परेशानी सर्वे कराने के दिए निर्देश।
- Written By: आलोक उमाकृष्ण
छत्रपति संभाजीनगर मनपा की आम सभा (फोटो नवभारत)
Sambhajinagar Private Agency Property Survey: महानगरपालिका क्षेत्र की सभी संपत्तियों का पांच वर्षीय पुनर सर्वेक्षण अब निजी एजेंसी के माध्यम से कराया जाएगा। मंगलवार को आयोजित महानगरपालिका की आमसभा में करीब तीन घंटे चली तीखी बहस के बाद इस महत्वपूर्ण प्रस्ताव को बहुमत से मंजूरी दे दी गई।
प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान सत्ता और विपक्ष के अनेक नगरसेवकों ने पहले के निजी सर्वेक्षणों में हुई गड़बड़ियों का मुद्दा उठाते हुए जनता को हुई परेशानियों का उल्लेख किया, जबकि कई सदस्यों ने महानगरपालिका की खराब आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए सर्वेक्षण को आवश्यक बताया।
अंत में महापौर समीर राजूरकर ने प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए कि सर्वे के दौरान किसी भी नागरिक को अनावश्यक परेशानी नहीं होनी चाहिए तथा पूरी प्रक्रिया पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ संचालित की जाए।
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आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए रखा गया प्रस्ताव
महाराष्ट्र महानगरपालिका अधिनियम की अनुसूची ‘ड’ के प्रकरण-8 नियम 21(2) के अनुसार प्रत्येक पांच वर्ष में संपत्तियों का सर्वेक्षण किया जाना आवश्यक है। इसी प्रावधान के तहत मनपा प्रशासन ने निजी एजेंसी के माध्यम से शहर की सभी संपत्तियों का सर्वे कराने का प्रस्ताव आमसभा में रखा।
प्रशासन का कहना था कि कोल्हापुर, सांगली, सातारा, अमरावती, अकोला और जलगांव महानगरपालिकाओं ने निजी एजेंसियों के माध्यम से सर्वे कर बड़ी संख्या में कर दायरे से बाहर की संपत्तियों को कर प्रणाली में शामिल किया, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई। इसी तर्ज पर छत्रपति संभाजीनगर में भी सर्वे कर राजस्व बढ़ाया जा सकता है।
पुराने अनुभवों का हवाला देकर हुआ विरोध
वरिष्ठ नगरसेवक राजू वैद्य ने प्रस्ताव का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि पूर्व में हैदराबाद की स्पेक एजेंसी को सर्वे का कार्य सौंपा गया था, लेकिन उसकी गंभीर त्रुटियों का खामियाजा आज भी शहर के नागरिक भुगत रहे हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि सर्वे का कार्य महानगरपालिका के 140 बिल कलेक्टरों के माध्यम से कराया जाए।
वरिष्ठ नगरसेवक अफसर खान ने भी उनके मत का समर्थन किया। वैद्य ने बिल कलेक्टरों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए उनके कार्यों का ऑडिट कराने की मांग की। स्पेक एजेंसी के अलावा श्री मित्र एप और जीआईएस मैपिंग के माध्यम से किए गए पूर्व सर्वेक्षणों में सामने आई विसंगतियों का भी कई नगरसेवकों ने उल्लेख किया और प्रशासनिक तंत्र से ही सर्वे कराने की पैरवी की।
राजस्व बढ़ाने के लिए जरूरी बताया सर्वे
चर्चा के दौरान अनेक नगरसेवकों ने कहा कि संपत्ति कर और पेयजल कर ही महानगरपालिका की आय के सबसे बड़े स्रोत हैं। वर्तमान में बड़ी संख्या में ऐसी संपत्तियां हैं जो कर प्रणाली से बाहर हैं। यदि नए सर्वे के माध्यम से इन संपत्तियों को कर दायरे में लाया गया तो महानगरपालिका की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार होगा और विकास कार्यों के लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध होंगे।
विपक्ष ने भी रखा समर्थन, रखी यह शर्त
विपक्ष के नेता समीर साजिद ने प्रस्ताव का समर्थन करते हुए कहा कि सर्वे का कार्य शहर के सभी दस जोनों में एक साथ शुरू किया जाए ताकि किसी क्षेत्र के साथ भेदभाव न हो। उन्होंने प्रशासन को भरोसा दिलाया कि झुग्गी बस्तियों और मध्यमवर्गीय क्षेत्रों में कर प्रणाली से बाहर की संपत्तियों को चिन्हित करने में एमआईएम के 33 नगरसेवक पूरा सहयोग देंगे।
निजी एजेंसियों की कार्यशैली पर उठे सवाल
उपमहापौर राजेंद्र जंजाल ने निजी एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि ठेका मिलने तक एजेंसियां पूरी जिम्मेदारी दिखाती हैं, लेकिन भुगतान मिलने के बाद उनकी जवाबदेही समाप्त हो जाती है। उन्होंने पूर्व के अनुभवों का हवाला देते हुए प्रशासन से एजेंसी पर प्रभावी निगरानी रखने की मांग की। कई नगरसेवकों ने भी चेतावनी दी कि सर्वे के नाम पर नागरिकों को किसी प्रकार का मानसिक या प्रशासनिक उत्पीड़न नहीं होना चाहिए।
महापौर ने दिए सख्त निर्देश
करीब तीन घंटे की चर्चा के बाद महापौर समीर राजूरकर ने प्रस्ताव पर अपना पक्ष रखते हुए कहा कि एक अप्रैल 2027 के बाद नई पेयजल योजना के लिए हुडको से लिए गए ऋण का भुगतान महानगरपालिका को करना है। ऐसे में आय के स्रोत बढ़ाना समय की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि शहर की प्रत्येक कर योग्य संपत्ति को कर प्रणाली में शामिल करना अनिवार्य है, लेकिन यह कार्य पूरी पारदर्शिता और संवेदनशीलता के साथ होना चाहिए। उन्होंने प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए कि निजी एजेंसी सर्वे के दौरान नागरिकों को किसी भी प्रकार की अनावश्यक परेशानी न पहुंचाए और शिकायत मिलने पर तत्काल कार्रवाई की जाए। इसके बाद बहुमत से प्रस्ताव पारित कर दिया गया।
– नवभारत लाइव के लिए छत्रपति संभाजीनगर से शफीउल्ला हुसैनी की रिपोर्ट
