Sambhajinagar: डिजिटल हाजिरी से पारदर्शिता बढ़ेगी, लेकिन ग्रामीण क्षेत्र में मजदूर परेशान; मनरेगा काम प्रभावित
MGNREGA Attendance System: संभाजीनगर में मनरेगा के तहत मजदूरों की हाजिरी अब फेस रीडिंग से दर्ज हो रही है। पारदर्शिता बढ़ाने की पहल में ग्रामीण क्षेत्र में तकनीकी समस्याएं बड़ी चुनौती बन रही हैं।
- Written By: अंकिता पटेल
MGNREGA Biometric Attendance Problem( Source: Social Media )
MGNREGA Biometric Attendance Problem: छत्रपति संभाजीनगर महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए अब मजदूरों की उपस्थिति ‘फेस रीडिंग’ के जरिए दर्ज करना अनिवार्य कर दिया गया है।
29 मार्च से यह नया नियम लागू हो चुका है और सोयगांव तहसील में भी इसकी शुरुआत हो गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में कमजोर नेटवर्क व तकनीकी सीमाओं के कारण इस व्यवस्था के क्रियान्वयन में कई बाधाएं सामने आ रही हैं।
पारंपरिक हाजिरी रजिस्टर में हस्ताक्षर या अंगूठा लगाने की जगह अब मोबाइल ऐप के जरिए मजदूरों का फोटो लेकर ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज की जा रही है।
सम्बंधित ख़बरें
उदयनराजे और मैं अंपायर, हम ही तय करेंगे कौन आउट और कौन नॉट आउट, सातारा में शिवेंद्रसिंहराजे की सियासी बल्लेबाज
संत रुपलालजी महाराज स्मारक के 80 करोड़ प्रस्ताव पर विवाद गहराया, मांग पर अड़ा बारी महासंघ
कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके के छत्रपति संभाजीनगर के वालूज स्थित घर पर बढ़ा सुरक्षा घेरा
छत्रपति संभाजीनगर: चौथे दिन भी पेट्रोल-डीजल की किल्लत; जिलाधिकारी बोले- 30% अतिरिक्त आपूर्ति, अफवाहों से बचें
प्रशासन का दावा है कि इस नई प्रणाली से फर्जी मजदूर, नकली हाजिरी व फंड के दुरुपयोग पर रोक लगेगी। साथ ही ‘रियल टाइम’ में हाजिरी दर्ज होने से मजदूरी का भुगतान भी अधिक पारदर्शी व सीधे तरीके से संभव होगा।
इस प्रक्रिया के लिए सोयगांव पंचायत समिति द्वारा संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों को प्रशिक्षण भी दिया गया है। प्रशासन का उद्देश्य भले ही पारदर्शिता बढ़ाना हो, लेकिन सोयगांव जैसे दूरस्थ क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी व स्मार्टफोन की कमी बड़ी समस्या बनकर सामने आई है।
खासकर सिंचन कुओं जैसे कार्यों पर एक साथ बड़ी संख्या में मजदूर मौजूद रहते हैं, एक ही कार्यस्थल पर 100 मजदूरों की ‘फेस रीडिंग’ करने में एक घंटे से अधिक समय लग रहा है।
मजदूरी मिलने में विलंब की जताई जा रही आशंका
पहाड़ी क्षेत्रों में नेटवर्क की अनुपलब्धता के कारण हाजिरी दर्ज करने में देरी हो रही है, जिससे मजदूरी मिलने में भी विलंब की आशंका जताई जा रही है।
यह भी पढ़ें:-Sambhajinagar: रिक्शा चालकों के लिए मराठी अनिवार्यता पर विवाद, परमिट जांच के आदेश से ड्राइवरों में नाराजगी
रोहयो अभियंता दत्ता कटके के अनुसार, शासकीय आदेशा के अनुसार व्यवस्था तैयार है, लेकिन तकनीकी समस्याओं पर ध्यान देना जरूरी है। तकनीक के जरिए पारदर्शिता लाने की यह पहल सही दिशा में कदम जरूर है, लेकिन ग्रामीण बुनियादी सुविधाओं की कमी के चलते फिलहाल यह योजना प्रशासन व मजदूर दोनों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है।
