Sambhajinagar: रिक्शा चालकों के लिए मराठी अनिवार्यता पर विवाद, परमिट जांच के आदेश से ड्राइवरों में नाराजगी

Auto Rickshaw Permit Maharashtra: प्रताप सरनाईक के आदेश पर रिक्शा चालकों के परमिट की जांच और मराठी अनिवार्यता से विवाद गहराया। संगठनों ने विरोध जताया, हजारों चालकों पर रोजगार संकट की आशंका।
Sambhajinagar: Controversy over Marathi language mandate for rickshaw drivers; drivers resentful over orders for permit checks.
Marathi Language Rule Drivers( Source: Social Media )
Published on
Updated on

Sambhajinagar Marathi Language Rule Drivers: छत्रपति संभाजीनगर फर्जी परमिट व यात्रियों की बढ़ती शिकायतों को देखते हुए परिवहन विभाग ने राज्य में ऑटो रिक्शा चालकों के लिए मराठी भाषा की अनिवार्यता करने से बखेड़ा खड़ा हो गया है।

राज्य के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने रिक्शा परमिटों की पुनः व्यापक जांच के आदेश दिए हैं जिसमें यह भी जांचा जाएगा कि चालकों को मराठी भाषा ज्ञात है कि नहीं।

यह अभियान शुरू किया गया है व शीघ्र ही इसे पूरे राज्य में लागू किया जाएगा। इस फैसले का रिक्शा संगठनों ने पुरजोर विरोध किया है। उनका कहना है कि पहले से ही गैस की कमी से वे परेशान हैं।

ऐसे में नया नियम उनके लिए और मुश्किलें बढ़ाने वाला है। हाल में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर रिक्शा परमिट हासिल करने के प्रकरण सामने आए हैं।

मराठी न जानने वाले चालक व यात्रियों के बीच संवाद की कमी के चलते कई बार विवाद भी हुए हैं। समझा जाता है कि इसी पृष्ठभूमि में सरकार ने यह कदम उठाया है।

परिवहन विभाग के मौजूदा नियमों के अनुसार सार्वजनिक वाहन चलाने वाले चालकों को स्थानीय भाषा का ज्ञान होना जरूरी है। हालांकि, अब तक इस नियम का सख्ती से पालन नहीं हो रहा था।

जांच में दोषी पाए जाने वाले चालकों के परमिट रद्द किए जा सकते हैं। गलत तरीके से परमिट जारी करने वाले अधिकारियों पर भी कार्रवाई हो सकती है। जिले में करीब 35,000 से अधिक रिक्शा चालक हैं।

इनमें बड़ी संख्या में ऐसे चालक है जिन्हें मराठी भाषा में कठिनाई होती है या जो अन्य राज्यों से आकर यहां काम कर रहे हैं। इस निर्णय से उनके सामने रोजगार का संकट खड़ा होने की आशंका है।

फैसले पर पुनर्विचार करें सरकार

हिंदी भाषा का ज्ञान होना जरूरी है। ऑटो राज्य में रहने वाले नागरिकों को मराठी व रिक्शा चालकों के लिए मराठी भाषा अनिवार्य करने का सरकार का निर्णय अन्यायकारक है, रोज कमाकर जीवन यापन करने वाले रिक्शा चालकों पर इस तरह का नियम बौपने से गरीब व मेहनतकश रिक्शा चालकों पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा। सरकार इस फैसले पर पुनर्विचार करें।

- सांसद डॉ. कल्याण काले

नए नियम से बढ़ेगा संकट

राज्य सरकार लगातार नए आदेश ला रही है। मराठी बोलने की अनिवार्यता थोपना गलत है, पहले ही गैस की कमी से चालक परेशान हैं। अब यह नियम उनके संकट को और बढ़ाएगा। हम इस निर्णय का विरोध करते हैं।

- महाराष्ट्र रिक्शा एसोसिएशन, जिलाध्यक्ष, सलीम खामगांवकर

Navbharat Live
navbharatlive.com