Maharashtra में कौशल आधारित शिक्षा रुकी, प्रशिक्षक न होने से प्रशिक्षण बंद
Maharashtra की 1300 सरकारी शालाओं में व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रशिक्षकों का करार समाप्त होने से बंद हो गया। एक लाख विद्यार्थी दसवीं-बारहवीं परीक्षा से पहले कौशल शिक्षा से वंचित हो गए हैं।
- Written By: अपूर्वा नायक
पीएम श्री योजना (सौ. सोशल मीडिया )
Chhatrapati Sambhajinagar News In Hindi: ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को कौशल-आधारित शिक्षा देने के उद्देश्य से राज्य की लगभग 1300 सरकारी माध्यमिक शालाओं में संचालित व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम सोमवार से पूरी तरह बंद हो गया है।
प्रशिक्षकों का करार समाप्त होने के बाद अब नए करार पर नियुक्ति होने तक प्रशिक्षण शुरू नहीं हो सकेगा। दसवीं और बारहवीं की परीक्षाएं निकट होने के कारण अचानक रुके इस प्रशिक्षण से राज्यभर के लगभग एक लाख विद्यार्थी और उनके अभिभावक भारी तनाव में आ गए हैं।
नई शिक्षा नीति के तहत कौशल विकास आधारित शिक्षा देने की योजना ‘समग्र शिक्षा अभियान’ और ‘पीएम श्री योजना’ के अंतर्गत लागू की गई है। महाराष्ट्र प्राथमिक शिक्षा परिषद के माध्यम से जिला परिषद, महानगरपालिका शालाओं, शालेय शिक्षा विभाग और सरकारी आदिवासी आश्रमशालाओं में कक्षा 9वीं, 10वीं से लेकर 12वीं तक के विद्यार्थियों को 2014 से व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जा रहा था। प्रशिक्षकों का करार तय अवधि पूरी होते ही समाप्त हो गया, जिसके कारण शिक्षण गतिविधियां स्थगित करनी पड़ीं। नया करार होने तक विद्यार्थियों को प्रशिक्षण से वंचित रहना पड़ेगा।
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30 नवंबर तक बढ़ाई गई थी कार्यावधि
इस योजना के तहत 100 अंकों के 15 व्यावसायिक पाठ्यक्रम संचालित किए जाते हैं। विद्यार्थियों को प्रायोगिक रूप से प्रशिक्षण मिले, इसके लिए संबंधित शालाओं में दोपहिया चौपहिया वाहन सहित अन्य पाठ्यक्रमों से जुड़ी मशीनरी भी उपलब्ध कराई गई है।
इन पाठ्यक्रमों के लिए एक निजी संस्था (एजेंसी) के माध्यम से प्रशिक्षक (वीटी) नियुक्त किए जाते हैं, जिन्हें 20 हजार रुपये तक का मानदेय दिया जाता है। हालांकि, यह मानदेय समय पर न मिलने की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं, जबकि प्रशिक्षकों का कार्य विद्यालय के मुख्याध्यापक के अधीन ही होता है।
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प्रशिक्षकों की पिछली नियुक्ति 28 जुलाई को हुई थी। इसके बाद महाराष्ट्र प्राथमिक शिक्षा परिषद के उपसंचालक संजय डोलिंकर द्वारा जारी एक पत्र के अनुसार प्रशिक्षकों को 1 अक्टूबर से 30 नवंबर तक कार्यावधि बढ़ाई गई थी। यह अवधि समाप्त होने के बाद लगभग एक लाख विद्यार्थियों के सामने प्रशिक्षण रुकने की समस्या खड़ी हो गई है।
