Maharashtra Board Exam ( सोर्स: सोशल मीडिया )
External Examiner Exchange Policy: छत्रपति संभाजीनगर महाराष्ट्र राज्य माध्यमिक व उच्च माध्यमिक शिक्षण मंडल द्वारा आयोजित दसवीं की लिखित परीक्षा शुक्रवार 20 से शुरू हो गई है। परीक्षा से पहले ही मंडल ने एक महत्वपूर्ण और दूरगामी निर्णय लेते हुए पहली बार बाह्य परीक्षकों की अदला-बदली लागू करने की घोषणा की।
परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, निष्पक्षता और नकलमुक्त वातावरण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है। मंडल का मानना है कि इस व्यवस्था से परीक्षा केंद्रों पर संभावित अनियमितताओं पर प्रभावी रोक लग सकेगी।
छत्रपति संभाजीनगर विभाग के जालना, बीड, परभणी, छत्रपति संभाजीनगर और हिंगोली जिलों से कुल 1 लाख 91 हजार विद्यार्थी दसवीं की परीक्षा में सम्मिलित हुए हैं। इतनी बड़ी परीक्षा को सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए मंडल ने विशेष रणनीति अपनाई है।
नई व्यवस्था के तहत निजी या बिना अनुदानित स्कूलों के शिक्षकों को सरकारी अनुदानित विद्यालयों में बाह्य परीक्षक के रूप में नियुक्त किया जाएगा, जबकि अनुदानित स्कूलों के शिक्षकों को निजी विद्यालयों में जिम्मेदारी दी जाएगी।
इस अदला-बदली से स्थानीय दबाव, पहचान या संभावित मिलीभगत की संभावना कम होगी। पिछले कुछ वर्षों में कुछ परीक्षा केंद्रों पर नकल और अन्य अनियमितताओं के मामले सामने आए थे।
इसी पृष्ठभूमि में मंडल ने इस बार कड़े प्रशासनिक उपाय लागू किए हैं। विद्यार्थियों के मानसिक तनाव को ध्यान में रखते हुए मंडल ने समुपदेशन की व्यवस्था भी की है। विभागीय स्तर पर प्रत्येक जिले में दो-दो समुपदेशकों को नियुक्ति की गई है, जो विद्यार्थियों की शंकाओं का समाधान और मार्गदर्शन करेंगे।
शिक्षा विभाग ने चेतावनी दी है कि परीक्षा के दौरान किसी भी प्रकार का गैरकृत्य करने वाले, उसमें सहयोग देने वाले या अनुचित साधनों का उपयोग करने वालों पर संज्ञेय और गैरजमानती अपराध दर्ज किया जाएगा।
यह भी पढ़ें:-छत्रपति संभाजीनगर: प्रचार की कमी से योजना फीकी, 40 पद स्वीकृत, चयन केवल 24-विदेशी छात्रवृत्ति पर सवाल
इसके अलावा परीक्षा केंद्रों के 500 मीटर परिसर में स्थित फोटोस्टेट (जेरॉक्स) केंद्र परीक्षा अवधि में बंद रहेंगे संबंधित क्षेत्र में दंड प्रक्रिया संहिता की चारा 163 लागू रहेगी और नकलमुक्त वातावरुण बनाए रखने के लिए विशेष उड़नदस्ते लगातार निगरानी करेंगे, महल के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इन सख्त कदमों से विद्यार्थियों को उनकी वास्तविक गुणवता के अनुसार अंक मिलेंगे और परीक्षा प्रक्रिया अधिक विश्वसनीय बनेगी।