
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Sambhajinagar Vehicle Pollution: छत्रपति संभाजीनगर शहर में प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (पीयूसी) के बिना बड़ी संख्या में वाहन खुलेआम सड़कों पर दौड़ते नजर आ रहे हैं। जिले में लगभग 80 प्रतिशत वाहन विना पीयूसी प्रमाणपत्र के चल रहे हैं, जिससे वायु प्रदूषण में भारी वृद्धि हो रही है।
इस गंभीर स्थिति के बावजूद आरटीओ और यातायात पुलिस प्रशासन की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है, जिससे नागरिकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। पीयूसी प्रमाणपत्र प्रत्येक वाहन के लिए अनिवार्य है, जो वाहन के इंजन से निकलने वाले धुएं में प्रदूषण के स्तर की जांच के बाद जारी किया जाता है।
यह प्रमाणपत्र मोटर वाहन अधिनियम 1988 और केंद्रीय मोटर वाहन नियम 1989 के अंतर्गत अनिवार्य किया गया है। इसके माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाता है कि वाहन से निकलने वाला धुआं तय मानकों के भीतर है या नहीं। आमतौर पर चारपहिया वाहन चालक नियमित रूप से पीयूसी प्रमाणपत्र बनवाते हैं, लेकिन दोपहिया वाहनों की बड़ी संख्या बिना पीयूसी के सड़कों पर चल रही है।
चिंताजनक बात यह है कि अत्यधिक धुआं छोड़ने वाले कुछ वाहनों को भी आसानी से पीयूसी प्रमाणपत्र मिल रहा है। नियमित जांच के अभाव में ऐसे वाहन बेरोकटोक यातायात में शामिल हो रहे हैं।
नागरिकों का कहना है कि यदि समय-समय पर जांच अभियान चलाए जाएं और नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए, तो प्रदूषण पर नियंत्रण पाया जा सकता है।
दोपहिया वाहनों के लिए पीयूसी प्रमाणपत्र 50 से 100 रुपये में, तीनपहिया वाहनों के लिए 100 से 150 रुपये में तथा चारपहिया वाहनों के लिए 150 से 200 रुपये में प्राप्त किया जा सकता है।
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यदि वाहन चालक के पास पीयूसी प्रमाणपत्र नहीं है, तो दोपहिया और तीनपहिया वाहन पर 2,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है, जबकि चारपहिया वाहन के लिए यह जुर्माना 4,000 रुपये तक हो सकता है। यह कार्रवाई यातायात पुलिस या आरटीओ द्वारा की जाती है।
नया वाहन होने पर कंपनी की ओर से एक वर्ष के लिए पीयूसी प्रमाणपत्र दिया जाता है। इरस्के बाद प्रमाणपत्र की अवधि समाप्त होने पर हर छह महीने में पीयूसी जांच कराना आवश्यक होता है। छत्रपति संभाजीनगर जिले में कुल 40 पीयूसी जांच केंद्र कार्यरत है।






