प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Sambhajinagar CBI Special Court: छत्रपति संभाजीनगर भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) के टेलीफोन बिल छपाई ठेके में 2000 में हुए करोड़ों रुपए के घोटाले में सीबीआई के विशेष न्यायालय का बड़ा फैसला आया है।
न्यायाधीश संजय के। कुलकर्णी ने 7 आरोपियों को दोषी करार देते हुए कारावास व दंड की सजा सुनाई, इनमें बीएसएनएल के पूर्व महाप्रबंधक दर्शनकुमार खन्ना के अलावा निदेशक (वित्त) गणपत भोकारे, दानिश भगत, रोहन वैद्य, कार्तिक आरके शाहनी व रोहित गुप्ता शामिल हैं।
बीएसएनएल के शहर स्थित कार्यालय में टेलीफोन बिल छपाई के ठेके में गंभीर अनियमितताएं सामने आई थीं। वर्ष 2000 में सीबीआई ने जांच में पाया कि पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों ने जेरॉक्स मॉडिकॉर्प लिमिटेड अधिकारियों के साथ मिलीभगत करते हुए निविदा प्रक्रिया में हस्तक्षेप किया।
निजी कंपनी की आर्थिक लाभ व बीएसएनएल को भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा। जांच में यह भी उजागर हुआ कि ठेका देने के बदले घूस ली थी। सीबीआई की ओर से विशेष सरकारी वकील अरविंद कुमार ने न्यायालय में यह साबित किया कि महाप्रबंधक दर्शन कुमार खन्ना, निदेशक (वित्त) गणपत भोकारे व अन्य आरोपियों ने पद का दुरुपयोग कर रिश्वत ली। सुनवाई के बाद न्यायालय ने इसे महमज नियम उल्लंघन नहीं, बल्कि जानबूझकर की गई धोखाधड़ी करार देते हुए सभी आरोपियों को दोषी ठहराया।
न्यायालय ने पूर्व महाप्रबंधक दर्शन कुमार खन्ना को 2 वर्ष का कठोर कारावास व कुल 2 लाख रुपए दंड, निदेशक (वित्त) गणपत भौकारे को अलग-अलग धाराओं में 2 वर्ष कठोर कारावास व एक लाख रुपए दंड की सजा सुनाई गई।
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खन्ना, भोकारे, दानियश भगत, रोहन वैडा, कार्तिक शाहनी व रोहित गुप्ता को आपराधिक षड्यंत्र का दोषी ठहराया गया। हर आरोपी को 6 माह के कठोर कारावास व 25-25,000 रुपए दंड की सजा सुनाई गई। दंड नहीं चुकाने पर 1 माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा,
धोखाधड़ी के आरोप में दानिश, रोहन, कार्तिक व गुप्ता को एक वर्ष कठोर कारावास व 50-50,000 रुपए दंड की सजा सुनाई गई है। दह न भरने पर एक माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।