महाराष्ट्र में मुस्लिम आरक्षण रद्द होने पर मचा बवाल! कांग्रेस ने महायुति सरकार बोला हमला, कहा- सबका साथ...

Muslim Reservation Controversy: महाराष्ट्र की महायुति सरकार ने मुस्लिम समाज को मिलने वाला 5% आरक्षण और जाति प्रमाणपत्र वितरण की प्रक्रिया को रद्द कर दिया है। कांग्रेस ने इस फैसले पर तीखा हमला बोला है।
Varsha Gaikwad on Muslim Reservation
वर्षा गायकवाड़ व देवेंद्र फडणवीस (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Congress On Muslim Reservation: महाराष्ट्र की राजनीति में आरक्षण के मुद्दे पर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। राज्य की महायुति सरकार ने मुस्लिम समाज को सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में मिलने वाले 5% आरक्षण को पूरी तरह से रद्द करने का निर्णय लिया है। इस फैसले के साथ ही मुस्लिम समुदाय के लिए जारी रहने वाली जाति प्रमाणपत्र (Caste Certificate) और उनकी वैधता (Validity) प्रक्रिया पर भी तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है।

महाराष्ट्र शासन के सामाजिक न्याय व विशेष सहायता विभाग ने 17 फरवरी 2026 को एक संशोधित शासन निर्णय (GR) निकाला है। इस नए आदेश के तहत, मुस्लिम समाज के 'विशेष पिछड़ा प्रवर्ग-अ' (SBC-A) के अंतर्गत आने वाले व्यक्तियों को जाति प्रमाणपत्र और वैधता प्रमाणपत्र देने से संबंधित पुराने सभी शासनादेशों और परिपत्रकों को अधिकृत रूप से रद्द कर दिया गया है। इसका सीधा अर्थ यह है कि 2014 में कांग्रेस-राष्ट्रवादी कांग्रेस गठबंधन सरकार के दौरान शुरू की गई आरक्षण की प्रक्रिया अब पूरी तरह समाप्त हो गई है।

कांग्रेस ने फडणवीस सरकार पर किया तीखा हमला

इस फैसले के सामने आते ही विपक्षी दलों, विशेषकर कांग्रेस ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। मुंबई कांग्रेस की अध्यक्ष वर्षा गायकवाड ने इस निर्णय को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और मुस्लिम समाज के हकों पर गदा बताया है। गायकवाड ने सरकार के 'सबका साथ, सबका विकास' के नारे पर तंज कसते हुए कहा कि एक तरफ सरकार यह नारा देती है और दूसरी तरफ पिछड़े वर्गों के लिए प्रगति के रास्ते बंद कर रही है।

उन्होंने यह भी कहा कि बॉम्बे हाई कोर्ट ने पहले ही मुस्लिम समाज के लिए शिक्षा में 5% आरक्षण को मान्यता दी थी। इसके बावजूद, सरकार ने इसका कार्यान्वयन करने के बजाय पुराने अध्यादेशों को एक्सपायर होने दिया और अब पूरी प्रक्रिया ही रद्द कर दी है। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार पिछड़े वर्गों को मुख्यधारा में लाने के बजाय उन्हें फिर से अंधकार में धकेलने का काम कर रही है।

क्याें रद्द किया गया आरक्षण?

गौरतलब है कि 2014 में तत्कालीन सरकार ने मराठा समाज को 16% और मुस्लिम समाज को 5% आरक्षण देने की घोषणा की थी। हालांकि, कानूनी अड़चनों और अध्यादेश की समय सीमा समाप्त होने का हवाला देते हुए वर्तमान सरकार ने इन पुरानी प्रक्रियाओं को बंद करने का रास्ता चुना है। प्रशासन का तर्क है कि उच्च न्यायालय की अंतरिम रोक और अध्यादेश के कालबाह्य होने के कारण यह कदम उठाना अनिवार्य था।

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