अंतिम मनपा प्रभाग रचना की हुई घोषणा, वार्ड प्रारूप के साथ प्रभागों की जनसंख्या में भी बदलाव
Chhatrapati Sambhaji Nagar News: महापालिका चुनाव से पहले घोषित अंतिम प्रभाग रचना ने राजनीति में खलबली मचा दी है। मामूली बदलाव के नाम पर हुए फेरबदल से दलों की रणनीति बदल रही है।
- Written By: सोनाली चावरे
छत्रपति संभाजीनगर महापालिका (pic credit; social media)
Maharashtra Politics: छत्रपति संभाजीनगर महापालिका चुनाव से पहले घोषित अंतिम प्रभाग रचना ने शहर की राजनीति में नई सरगर्मी ला दी है। कई वार्डों का दायरा बढ़ा दिया गया है, जिससे सीधे तौर पर वहां की जनसंख्या, अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग की संख्या में बदलाव हुआ है। सरकार और प्रशासन इसे मामूली सुधार बता रहे हैं, लेकिन विपक्ष और महायुति के भीतर से नाराज़गी खुलकर सामने आ रही है।
23 अगस्त को प्रारूप योजना प्रकाशित होने के बाद नागरिकों को आपत्तियां और सुझाव दर्ज कराने के लिए 4 सितंबर तक का समय दिया गया था। इस दौरान 552 आपत्तियां और सुझाव सामने आए। सुनवाई के लिए राज्य सरकार ने महिला एवं बाल विकास विभाग के सचिव अनूप कुमार यादव को नियुक्त किया था। सुनवाई पूरी होने के बाद नगर नियोजन विभाग ने रिपोर्ट सरकार को सौंपी और अंततः 3 अक्टूबर को चुनाव आयोग ने इसे मंजूरी दे दी।
हालांकि आयोग ने यह स्पष्ट नहीं किया कि किस आपत्ति को स्वीकार किया गया और किन बदलावों को खारिज कर दिया गया। यही वजह है कि अब नागरिक और राजनीतिक दल प्रारूप और अंतिम प्रभाग योजना का तुलनात्मक अध्ययन कर असली तस्वीर जानने की कोशिश कर रहे हैं।
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राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया
कांग्रेस शहराध्यक्ष शेख यूसुफ का कहना है कि “प्रभाग रचना पूरी तरह से सत्ता पक्ष के फायदे को देखते हुए की गई है।” वहीं शिवसेना (उभाठा) के महानगर प्रमुख राजू वैद्य का कहना है कि बदलाव हुए हैं, लेकिन वे बहुत मामूली हैं। दूसरी ओर, शिवसेना (शिंदे गुट) के नेता राजेंद्र जंजाल ने विपक्ष पर पलटवार करते हुए कहा, “बिना उम्मीदवारों वाली पार्टियां हार की आशंका से ही आपत्तियां उठा रही हैं। हम पहले भी तैयार थे और अब भी हैं।”
कहां हुआ विस्तार
अंतिम योजना में कुछ वार्डों में नई बस्तियां जोड़ी गई हैं। इनमें भारत माता नगर, छत्रपति नगर, सारा वैभव, फरहत नगर, गणेश कॉलोनी, हिमायत बाग, मारुति नगर, भवानी नगर, सावित्री नगर, वसंत नगर और माई वर्ल्ड जैसी बस्तियां शामिल हैं। इन नए जोड़े गए क्षेत्रों से राजनीतिक दलों की रणनीति बदलना तय है।
राजनीतिक गणित बदलेगा
विशेषज्ञों का मानना है कि वार्ड सीमाओं में मामूली दिखने वाले ये बदलाव चुनावी नतीजों पर बड़ा असर डाल सकते हैं। खासतौर पर अनुसूचित जाति और जनजाति जनसंख्या में हुए फेरबदल से कई प्रभागों का समीकरण पूरी तरह बदल जाएगा। महायुति भले ही इसे सुधार मान रही हो, लेकिन अंदरखाने की बेचैनी साफ झलक रही है।
